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भारतीय वन सर्वेक्षण: ताजा रिपोर्ट में हुआ खुलासा, देश के 20 टाइगर रिजर्व में फॉरेस्ट कवर में मामूली बढ़ोतरी

Sun, 16 Jan 2022 02:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून

सार

इंडिया स्टेट आफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 पर नजर डालें तो राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व देश की 32 टाइगर रिजर्व में तमाम प्रयासों के बावजूद फॉरेस्ट कवर में कमी दर्ज की गई है। जो चिंताजनक पहलू है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देशभर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह रिपोर्ट चिंतित करने वाली है। देश भर में साल दर साल बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। साल 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के टाइगर रिजर्व में बाघों का आंकड़ा 2967 से अधिक है। वहीं भारतीय वन सर्वेक्षण की हाल ही में जारी की गई इंडिया स्टेट आफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 पर नजर डालें तो राजाजी टाइगर रिजर्व, जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व देश की 32 टाइगर रिजर्व में तमाम प्रयासों के बावजूद फॉरेस्ट कवर में कमी दर्ज की गई है। जो चिंताजनक पहलू है।

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हालांकि सुकून देने वाली बात यह है कि राजाजी व जिम कार्बेट, दुधवा नेशनल पार्क, सरिस्का टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे टाइगर रिजर्व में जहां फॉरेस्ट कवर पिछली बार की तुलना में इस बार कम हुआ है, वहीं पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व, तमिलनाडु के अन्नामलाई टाइगर रिजर्व, सम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व के अलावा पलामू, सह्याद्री,  सतपुड़ा्र जैसे टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट कवर में इजाफा भी हुआ है। भारतीय वन सर्वेक्षण की ओर से जारी की गई इंडिया स्टेट आफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 की रिपोर्ट पर नजर डालें तो राजाजी टाइगर रिजर्व में साल 2011 में किए गए सर्वेक्षण में जहां बाघों के लिए 631.2 वर्ग किलोमीटर घना जंगल था। वहीं 2021 के सर्वेक्षण में यह घटकर 563.4 वर्ग किलोमीटर पर पहुंच गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट कवर में 30.2 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई है।

 जहां तक जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व का सवाल है तो भारतीय वन सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की ओर से साल 2011 में किए गए वन सर्वेक्षण में जिम कार्बेट में 825.4 किलोमीटर घने जंगल में बाघों का आशियाना था। जो साल 2021 की गणना में 793.4 वर्ग किलोमीटर पाया गया है। जहां तक जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में खुले वन क्षेत्र का सवाल है तो उसमें भी कमी आई है। साल 2011 के सर्वेक्षण में जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में 91.6 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल था जो 2021 तक पहुंचते-पहुंचते 79.8 वर्ग किलोमीटर हो गया है। 
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जिम कार्बेट-दुधवा टाइगर रिजर्व कॉरिडोर और राजाजी- जिम कार्बेट टाइगर कॉरिडोर के क्षेत्रफल में भी कमी 
भारतीय वन सर्वेक्षण की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक न सिर्फ जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट कवर में कमी आई है, वरन जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व-दुधवा नेशनल टाइगर रिजर्व कॉरिडोर  में 21.4 वर्ग किमी, राजाजी टाइगर रिजर्व-जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व कॉरिडोर में 17.4 वर्ग किमी की कमी पायी गई है। कॉरिडोर के फारेस्ट कवर में कमी होने से बाघों के एक टाइगर रिजर्व से दूसरे में आने जाने पर दिक्कतें होगी। 

बाघों की संख्या बढ़ रही, घट रहा फॉरेस्ट कवर
उल्लेखनीय पहलू है कि जहां जिम कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में के फॉरेस्ट कवर में कमी दर्ज की गई है, वहीं दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की ओर से कराए गए बाघों के सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में उत्तराखंड में बाघों की संख्या कुल 442 पायी गई थी। ऐसे में वर्तमान में बाघों की संख्या 500 से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। जहां तक सबसे अधिक बाघों वाले राज्यों का सवाल है तो मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 526 बाघ चिह्नित किए गए थे। वहीं कर्नाटक में 524, तमिलनाडु में 264, आसाम में 190, उत्तर प्रदेश में 173, हिमाचल, आंध्र प्रदेश में 48, महाराष्ट्र में कुल 312 भाग चिह्नित किए गए थे।

देश के इन टाइगर रिजर्व में घट गया फॉरेस्ट कवर 
भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों में स्थित जिम कार्बेट, राजाजी, अचानकमार, बांदीपुर, भद्रा, बोर, दंफा, दुधवा नेशनल टाइगर रिजर्व, कलक्कड़ टाइगर रिजर्व तमिलनाडु, कान्हा, कवल, मेलघाट, नामेरी, नामदाफा, ओरांग, पेंच, पेरियाल, पीलीभीत, नागरहोल, रणथंभौर,  नागार्जुन सागर श्रीशैलम, वाल्मीकि, नावेगांव नागजीरा, मुदुमलाई, जैसे 32 टाइगर रिजर्व में फॉरेस्ट कवर में कमी रिकॉर्ड की गई है।

बक्सा टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक 238.8 वर्ग किमी फॉरेस्ट कवर की बढ़ोतरी 
जहां एक तरफ जिम कार्बेट, राजाजी टाइगर रिजर्व, सरिस्का, रणथंभौर, बांधवगढ़ बांदीपुर जैसे देश के नामचीन टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट कवर में कमी दर्ज की गई है, वहीं पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक 238.8 किमी फारेस्ट कवर में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरे नंबर पर तमिलनाडु के अन्नामलाई टाइगर रिजर्व में 120.7 वर्ग किलोमीटर फॉरेस्ट कवर की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई है। देश की जिम टाइगर रिजर्व में फॉरेस्ट कवर में बढ़ोतरी हुई है उसमें काजीरंगा, अमराबाद,  अन्नामलाई,  बक्सा टाइगर रिजर्व,  बिलीगिरी रंगनाथा, इंद्रावती, पन्ना, रामगढ़, सत्यमंगलम, सीमलीपाल, तदोभा आंधारी, सहयाद्री, मानस जैसे टाइगर रिजर्व शामिल है। 

देश के टाइगर रिजर्व में फारेस्ट कवर को लेकर किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि देश के 32 टाइगर रिजर्व के फारेस्ट कवर में कमी आयी है। जबकि 20 टाइगर रिजर्व के फारेस्ट कवर में बढ़ोतरी हुई है। सुकून देने वाली बात यह है कि जिन टाइगर रिजर्व में फारेस्ट कवर कम हुआ है उसका क्षेत्रफल बहुत अधिक नहीं है। लेकिन फिलहाल जिस तरीके से टाइगर रिजर्व में बाघों समेत तमाम वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हो रहा है उसे देखते हुए जंगलों को बचाने के साथ ही अधिक से अधिक विकसित किए जाने की जरूरत है। रिपोर्ट केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंप दी गई है। 
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- प्रकाश लखचौरा, उप महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण 

 

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