सिलक्यारा हादसे के बाद पहाड़ में सुरक्षात्मक इंजीनियरिंग
देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने वाले सिलक्यारा सुरंग हादसे ने पहाड़ में विकास कार्यों की इंजीनियरिंग को बदलकर रख दिया है। इस हादसे के बाद जहां सिलक्यारा सुरंग निर्माण में खास सावधानी बरती जा रही है। वहीं, विशेषज्ञ समिति के सुझावों का भी खास ख्याल रखा जा रहा है। इसके साथ राज्य सरकार ने भी एसओपी तैयार कर पहाड़ में इस तरह के हादसे को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। गत वर्ष चारधाम सड़क परियोजना में यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन साढ़े चार किमी लंबी सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में भूस्खलन के कारण 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे, जिन्हें 17 दिन चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बादनिकाला गया था। हादसे के करीब 9 माह बाद भी सुरंग के सिलक्यारा वाले मुहाने के पास गिरा मलबा पूरी तरह नहीं हट पाया है। हालांकि मलबा हटाने के लिए इसी माह मलबे में बनाई जा रही तीन मीटर चौड़ी पहली ड्रिफ्ट टनल आरपार हुई है। इस हादसे के बाद राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी निर्माण कार्यों में सावधानी का लेकर एसओपी तैयार की है।
विशेषज्ञ समिति के सुझाव
सिलक्यारा हादसे के बाद केंद्र ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने रिपोर्ट में इस तरह की सुरंग में रियल टाइम मॉनिटरिंग करने, कंक्रीट ह्यूम पाइप की निकासी या सर्विस सुरंग बनाने, श्रमिकों की सुरक्षा को्र अलार्म सिस्टम विकसित करने, लंबी सुरंगों के लिए कड़ी तकनीकी जांच करने, सुरंग केंद्र की स्थापना करने, हिमालयी क्षेत्र में परियोजना निर्माण के लिए विशेष रूप से तैयार एक सहयोगी भूवैज्ञानिक मंच बनाने की सिफारिश की है।
सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार ही सावधानी के साथ सुरंग निर्माण कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों की निगरानी में ही सुरंग की खोदाई के साथ ड्रिफ्ट टनल के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।
-अंशु मनीष खलको, निदेशक एनएचआईडीसीएल