भारी डिमांड और कम उपलब्धता के बीच रोजाना 12 से 15 करोड़ रुपये की बिजली खरीदने से घाटे की ओर बढ़ रहा ऊर्जा निगम अब अपना दर्द लेकर नियामक आयोग पहुंचा है। निगम ने आयोग के सामने अप्रैल-मई और जून की बिजली की मांग और कमी को पूरा करने के लिए खर्च होने वाले बजट का आंकड़ा भी पेश किया है। हालांकि आयोग से राहत मिलने के कम आसार हैं।
दरअसल, प्रदेश में बिजली की डिमांड लगातार 45 से 49 मिलियन यूनिट तक पहुंच रही है। इसके सापेक्ष ऊर्जा निगम को बाजार से औसत 9.48 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही है। यूपीसीएल के डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स अजय कुमार अग्रवाल की ओर से भेजे गए पत्र में पूरा हिसाब किताब बताया गया है।
इसमें कहा गया है कि पिछले साल एक अप्रैल से 30 जून के बीच यूपीसीएल ने 3.34 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर पर 151.86 करोड़ रुपये से 454.13 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी थी। इस साल जितनी डिमांड चल रही है, उस हिसाब से इन तीन महीने में निगम को 951.46 मिलियन यूनिट बिजली औसत 11.41 रुपये के दाम पर 1085.68 करोड़ रुपये खर्च करके खरीदनी पड़ेगी।