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'स्मैक के नशे ने मेरी जवानी छीन ली, मुझे नशेड़ी बना दिया और...' युवक ने बयां की अपनी कहानी

Fri, 31 Jan 2020 05:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रमोहन शुक्ला, अमर उजाला, कोटद्वार

सार

  • गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में सैकड़ों युवा स्मैक जैसे घातक नशे के शिकार
  • पर्वतीय इलाकों तक फल फूल रहा नशे का कारोबार, युवाओं में बढ़ी नशे प्रवृत्ति
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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स्मैक के नशे ने मेरी जवानी छीन ली और मुझे नशेड़ी बना दिया। हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान 14 साल की उम्र में पहले फ्लूड लेना शुरू किया और इसके बाद स्मैक। स्कूल के दोस्तों ने नशे के कई तरीके सिखा दिए। इन सबमें ज्यादा खतरनाक साबित हुआ स्मैक। एक बार स्मैक लेने के बाद सुबह से शाम तक नशा रहता है। पहले दोस्तों ने फ्री उपलब्ध कराया, इसके बाद स्कूल के लिए मिलने वाले जेब खर्च से खरीदने लगा।

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पैसे कम पड़े तो छोटी मोटी चोरी करने लगा। कई बार पुलिस भी पकड़कर ले जा चुकी है। एनडीपीएस एक्ट के तहत पौड़ी जेल की हवा भी खा चुका हूं। आज हालत यह है कि चाहकर भी नशा नहीं छोड़ पा रहा हूं। पढ़ाई छूट चुकी है, घरवालों के साथ ही समाज भी हेय दृष्टि से देखता है।

तब पता नहीं था कि एक छोटी सी पुड़िया मेरा भविष्य इस कदर बर्बाद कर देगा। बुरी तरह नशे का शिकार हुए एक स्थानीय युवक ने अपनी यह कहानी बयां की है। स्मैक के नशेड़ियों की कमोबेश ऐसी ही हालत है।

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युवक ने बताया कि कोटद्वार में नशे के कारोबार का बरेली से कनेक्शन है। पहले तस्कर ही स्मैक उपलब्ध कराते थे, लेकिन बाद में पुलिस की सख्ती के चलते तस्करों का कोटद्वार आना बंद हो गया। नशे की पूर्ति के लिए वह पहले बिजनौर से स्मैक लाता था। वहां स्मैक महंगा होने के कारण उसने और उसके साथियों ने खुद ही नजीबाबाद से बरेली पहुंचकर नशा खरीदना शुरू कर दिया।

बरेली में एक महिला जिसे चाची के नाम से जाना जाता था, इस धंधे में लिप्त थी। करीब ढाई साल पहले कोटद्वार पुलिस उस तक पहुंचने में सफल रही और तब उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वह काफी दिनों तक पौड़ी जेल में भी रही। सालभर पहले उसकी मौत होने के बाद यह धंधा उसकी बेटी और भतीजे ने संभाल लिया। पुलिस ने बीते साल में शराब तस्करी के 85 और एनडीपीएस के अभी तक 15 मामले दर्ज किए हैं।

स्मैक का नशा करने वाले युवाओं की संख्या सौ से पार

कोतवाल मनोज रतूड़ी के मुताबिक कोटद्वार क्षेत्र में स्मैक का नशा करने वाले युवाओं की संख्या सौ से पार है। करीब 35 नशेड़ी युवाओं को हाल में पुलिस ने चिह्नित किया है, जिनकी स्थानीय स्तर पर काउंसिलिंग भी की जा रही है। कोटद्वार में नशे का वाया बिजनौर बरेली से कनेक्शन है। हाल में कोटद्वार से सटे यूपी के ढकिया रामनगर के दो स्मैकियों को पुलिस ने देहरादून स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में भिजवाया है।

नशे की गिरफ्त में सबसे ज्यादा 14 से लेकर 30 साल के युवा

अखिल भारतीय नशाबंदी परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष एडवोकेट जगमोहन भारद्वाज का कहना है कि पहले शराब का ही बोलबाला था, लेकिन बीते कुछ वर्षों से स्मैक और अन्य नशे की प्रवृत्ति युवाओं में बढ़ती जा रही है। नशे की गिरफ्त में सबसे ज्यादा 14 से लेकर 30 साल के युवा हैं। हालांकि सामाजिक संगठनों के साथ ही पुलिस भी कार्यक्रमों के माध्यम से नशे के प्रति युवाओं को जागरूक कर रही हैं, लेकिन इतने मात्र से युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को रोक पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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नशे की गिरफ्त में आसानी से जो लोग आते हैं। उनमें सभी वर्गों के युवा शामिल हैं। नशे का कारोबार करने वाले पहले युवाओं को मुफ्त या बहुत कम कीमत पर नशा उपलब्ध कराते हैं और नशे की लत पड़ने पर युवाओं से इसकी पूरी कीमत वसूल की जाती है। शुरुआत में बच्चे अभिभावकों से मिलने वाले जेब खर्च से काम चलाते हैं और बाद में नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी सहित अन्य अपराधों को अंजाम देने से भी नहीं चूक रहे हैं।
- अनिल जोशी, सीओ कोटद्वार

हमारी संस्था में वर्तमान में 30 साल तक के 13 युवाओं का उपचार चल रहा है, इनमें शिक्षक, चिकित्सक तक शामिल हैं। यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन मिले तो वह नशे की गिरफ्त से बाहर आ सकते हैं।
- जसोदा जनार्दन बुड़ाकोटी, संस्थापक आशा किरन नशा मुक्ति केंद्र कोटद्वार 
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