हरमीत ने इस जघन्य हत्याकांड को संपत्ति के लिए अंजाम दिया था। यह बात अभियोजन कोर्ट में साबित करने में सफल रहा। हरमीत ने पकड़े जाने के बाद खुद को दिमागी रूप से बीमार भी बताया था, लेकिन चिकित्सकों की जांच में उसका यह दावा गलत साबित हुआ।
दरअसल, कारोबारी जय सिंह की पहली पत्नी से दो बेटे थे। इनमें एक हरमीत और दूसरा पारस था। पारस अपनी मां के साथ रहता था। जय सिंह और उनकी पहली पत्नी ने तलाक ले लिया था। जय सिंह के भाई अजीत सिंह ने अपनी बेटी हरजीत को बचपन में ही उन्हें गोद दे दिया था। अजीत ने बताया था कि हरमीत ने पहले भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। ताकि, जय सिंह की सारी संपत्ति पर वह काबिज हो सके। कोर्ट में अजीत सिंह की यह गवाही से भी साबित हुआ कि हत्या के बाद हरमीत जय सिंह की संपत्ति काबिज करना चाहता था।
इन सबसे बचने के लिए हरमीत ने खुद को दिमागी रूप से बीमार बताया था। वह पहले कुछ बयान नहीं दे रहा था, लेकिन मनो चिकित्सकों से उसकी जांच कराई गई। अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि चिकित्सकों ने उसके इस दावे को झूठा साबित कर दिया। उसका कभी कहीं किसी मनो चिकित्सक या मनो वैज्ञानिक से इलाज नहीं चलाया गया था।
चश्मदीद गवाह कंवलजीत की गवाही रही अहम
हत्याकांड में बचा हरमीत का भांजा कंवलजीत चश्मदीद गवाह बना था। हरमीत ने उसकी छोटी बहन सुखमणि को उसके सामने ही चाकू से गोद दिया था। उसने कंवलजीत पर भी वार किए थे, लेकिन इस बीच किसी वजह से उसे दया आ गई और उसे छोड़ दिया। चूंकि, कंवलजीत खुद पीड़ित भी था, लिहाजा उसकी गवाही आरोपी को दोषी ठहराने में अहम साबित हुई।
दीवाली की रात में पूरे मोहल्ले में आतिशबाजी हुई थी। रात में सभी ने इस आतिशबाजी में हिस्सा लिया था। इसके बाद जय सिंह व उनकी पत्नी एक कमरे में और हरजीत व उनके दोनों बच्चे एक कमरे में सोने के लिए चले गए। हरमीत ने पूरे परिवार के सोने का इंतजार किया था। इसके बाद उसने पहले अपने पिता और सौतेली मां को चाकू से गोदा था। इसके बाद दूसरे कमरे में हरजीत कौर और सुखमणि को मौत के घाट उतारा। इसी कमरे में कंवलजीत भी था। पांच साल का कंवलजीत ने वहां से भागने का प्रयास किया। हरमीत ने उसके हाथ पर भी चाकू से वार किया, लेकिन एकाएक वह रुक गया। पांच साल के कंवलजीत ने हत्याकांड के बाद पुलिस और कोर्ट में भी यही बयान दिए थे। हरमीत ही कंवलजीत से बहुत प्यार करता था। शायद उस वक्त उसने उसे इसी कारण मारने से छोड़ दिया।
हरमीत ने एक दिन पहले चाकू पर अंसारी मार्ग पर एक कारीगर से धार लगवाई थी। इस कारीगर परवेज आलम की भी मामले में गवाही हुई। आलम ने ने कोर्ट को बताया था कि जब वह उसके पास चाकू लेकर आया था तो उसे मना कर दिया गया था। इसके बाद जब उसने जबरदस्ती की तो चाकू पर धार लगा दी। परवेज आलम ने कोर्ट में भी उसकी पहचान की। इसके अलावा नौकरानी राजी ने भी गवाही दी। राजी ही सबसे पहले वहां पर पहुंची थी। उसे देखकर हरमीत ने कहा था कि आज काम नहीं कराएंगे, लेकिन जैसे ही उसने वहां का माहौल देखा तो वह चिल्लाकर बाहर आ गई।
कोर्ट ने किए कुल 12 प्रश्न, खुद को बताया बेकसूर
कोर्ट ने दोषी हरमीत से सोमवार को 12 प्रश्न किए। इनमें से ज्यादातर के जवाब उसने सही दिए, लेकिन हत्या की बात उसने कबूल नहीं की। इसके अलावा उसने अजीत सिंह द्वारा कही गई कुछ बातों की तस्दीक की। साथ ही साथ कई प्रश्नों में उसने जवाब गलत दिए।