पुलिस में मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद दो नवंबर 2007 को चार्जशीट दाखिल की। इस मामले में ट्रायल के दौरान कुतुबुद्दीन की मौत हो गई। अभियोजन ने 27 गवाह इस मुकदमे में प्रस्तुत किए। इसके अलावा 24 दस्तावेजी और 69 वस्तु साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया। इनके आधार पर न्यायालय ने महमूद अली और नईम राहत को हत्या
का दोषी पाया। जबकि, तेजपाल को साक्ष्यों के आभाव में बरी कर दिया। अब सजा के प्रश्न पर सोमवार को सुनवाई होगी।
पंजाब से बनवाया मृत्यु प्रमाणपत्र
आरोपियों ने दुग्गल की संपत्ति को हड़पने के लिए लंबा षड्यंत्र रचा था। देहरादून में हत्या कर शव जलाने के बाद उन्होंने एक व्यक्ति जिसकी ट्रेन दुर्घटना में मौत हो गई थी, उसे पुष्पेंद्र दुग्गल दर्शाते हुए पंजाब से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया। इस शव की पहचान नहीं हुई थी तो इसका उन्हें फायदा मिला। इस आधार पर ही दुग्गल की वसीयत तैयार की गई। मामले में पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराएं भी जोड़ी थीं, लेकिन अभियोजन इन धाराओं को साबित नहीं कर पाया। लिहाजा, कोर्ट ने इन आरोपों से आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।