आपदा के सात माह बाद भी उत्तरकाशी प्रशासन नगर के गंगाघाटों को सुरक्षित नहीं कर पाया है। अब 14 जनवरी को मकरैणी के स्नान को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी से भी बचता नजर आ रहा है।
नगर पालिका और सिंचाई विभाग ने श्रद्धालुओं से अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित स्थानों पर स्नान करने की अपील की है।
आपदा में घाटों को क्षति
जून की बाढ़ से नगर के मणिकर्णिका, जड़भरत, मंगल, लक्षेश्वर सहित गंगा के कई घाट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
इन घाटों पर स्नान करना खतरे से खाली नहीं है। सीढ़ियां बहने से फिसलन बनी हुई है। सुरक्षा के लिए जंजीरें भी नहीं हैं।
मांगों पर नहीं हुई कार्रवाई
नगरवासी घाटों पर सुरक्षा इंतजामों की मांग करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब 14 जनवरी को मकर संक्राति के दिन स्नान के लिए जिलेभर से देव डोलियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता तथा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने श्रद्धालुओं से खुद अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने की अपील की है। इस आशय की अपील प्रचार माध्यमों के जरिये की जा रही है।
इनका है कहना
शिव की नगरी उत्तरकाशी में मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का बड़ा धार्मिक महत्व है। इस स्नान पर्व पर देवडोलियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। सुरक्षित स्नान की व्यवस्था न किया जाना संबंधित विभाग एवं प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।
-अजय प्रकाश बडोला, गायत्री परिजन उत्तरकाशी