ऐसा संभव है कि आप 10 गायों की डेयरी खोलें और कम से कम पांच हजार रुपये रोज कमा लें। अगर आप 250-300 लीटर दूध हर रोज पैदा कर सकते हैं तो आपको 10 हजार तक की आमदनी आसानी से हो जाएगी। इसमें पांच हजार खर्चा होगा। यानी पांच हजार रुपये रोज की बचत। यह सलाह है देहरादून के यमुनोत्री एनक्लेव (बद्रीपुर) निवासी डेयरी विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. उगरेंद्र कुमार अथैया की।
वह बताते हैं कि ज्यादा बड़ी डेयरी बनाने की जरूरत नहीं है। अब एक ऐसा जीनोमिक सीमेन आ गया है, जिससे पैदा हुई बछिया पहली बार 24 महीने में बच्चे दे देती है। बच्चे के बीमार होने का खतरा भी कम रहता है। जीनोमिक मतलब यह है कि उसका जीन मोडिफाइड कर दिया गया है। ऐसी 10 गायें रख लीजिए। मान लिया जाए पांच गायें दूध देती हैं। पांच गर्भवती हैं या दूध नहीं दे रही हैं। 25 लीटर प्रतिदिन के हिसाब से 250 लीटर दूध हो गया। अगर 50 रुपये प्रति लीटर दूध भी बिका तो कम से कम 10 हजार रोजाना की आमदनी आसानी से जाएगी।
78 वर्षीय डॉ. अथैया यू ट्यूब चैनल बनाकर किसानों को डेयरी फार्मिंग की मुफ्त सलाह दे रहे हैं। वह नाम से यू ट्यूब चैनल चलाते हैं। इस पर वह किस तरह की गाय लेनी है, कैसे इमरजेंसी में मेडिसिन देनी है आदि महत्वपूर्ण सलाह देते हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय से बीवीएससी (बैचलर इन वैटिनरी साइंस), एमवीएससी (मास्टर इन वैटिनरी साइंस) एवं पीएचडी करने के बाद वहीं प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. अथैया शहर के कई प्राइवेट कॉलेजों में भी प्रोफेसर रहे हैं।
किताबें नहीं बन पाई उचित माध्यम तो यू ट्यूब का सहारा
डॉ. अथैया आज 78 साल की उम्र में भी जज्बा दिखाते हुए किसानों की उन्नति एवं प्रगति के लिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। उन्होंने डेयरी फार्मिंग पर किताबें भी लिखी। किताबों में लोगों की रुचि कम होने के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया। लिहाजा उन्होंने यू ट्यूब चैनल से डेयरी फार्मिंग पर किसानों को सलाह देने का निर्णय लिया। आज हजारों लोग उनके चैनल से जुड़े है। रोजाना कई राज्यों से लोग निशुल्क सलाह प्राप्त करते हैं। डॉ. अथैया का कहना है कि कोरोनाकाल के बाद डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में काफी बढ़ोतरी हुई है। कोरोनाकाल में मजदूर घर लौट आए और रोजगार न होने पर उन्हें डेयरी खोलने की प्रेरणा मिली। लोग स्वरोजगार की ओर बढ़े। इसमें डेयरी फार्मिंग एक बेहतर विकल्प साबित हुआ है।