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पुलिस ने बचाव के लिए रचा रणबीर एनकाउंटर का खेल!

Sun, 08 Jun 2014 04:02 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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जिस रणबीर एनकाउंटर के नाम पर डालनवाला पुलिस की बांछे खिल गई थी, अब वहीं एनकांउटर उनके गले की फांस बन चुका है।
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रणबीर के एनकाउंटर की साजिश रचने वाली डालनवाला पुलिस ने जिस धारा 302 से बचने की कोशिश की थी, सचाई की परतें उधड़ने के बाद वही धारा पुलिसकर्मियों का फंदा बन गई है।

सूत्र बताते हैं कि रणबीर की मौत हिरासत में अमानवीय पिटाई से हो गई थी। हत्या का यह दाग छिपाने के लिए मृत शरीर को लाडपुर के जंगल में ले जाकर गोलियों से छलनी किया गया।
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लेकिन इस पूरे खेल में पुलिस इस तथ्य को नजरअंदाज कर गई कि रणबीर के दारोगा से झगड़े और उसे हिरासत में लिए जाने का पूरा ब्योरा कंट्रोल रूम में दर्ज था।
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कुछ लोगों ने देखी थी हाथापाई

तीन जुलाई 2009 को रणबीर और उसके दो साथी आराघर चौकी इंचार्ज दारोगा जीडी भट्ट से उलझे तो उनमें हुई हाथापाई कुछ लोगों ने देखी थी।

एक शख्स ने 100 नंबर पर दारोगा से मारपीट की सूचना कंट्रोल रूम को दी थी। जिसके बाद मौके पर अन्य पुलिसकर्मी भेजे गए।

इसके साथ ही यह सूचना भी फ्लैश हुई कि रणबीर को पकड़ लिया गया है, जबकि उसके दो साथी भाग निकले थे। बताया जाता है कि युवकों के पास से तमंचा बरामद किए जाने की सूचना भी फ्लैश हुई थी।

सूत्रों की मानें तो पुलिस रणबीर को टार्चर रूम ले गई, जहां दारोगा से मारपीट का ‘बदला’ उससे लिया गया। इस दौरान गंभीर चोटें लगने से उसकी सांसें थम गईं। बताया जाता है कि हिरासत में ही रणबीर की मौत हो गई थी।

पुलिस के दामन पर 302 का दाग

सूत्रों के मुताबिक रणबीर की मौत होते ही पुलिसकर्मियों को कार्रवाई और हत्या के मुकदमे में फंसने का डर सताने लगा।

तुरंत वरिष्ठ अफसरों को सूचना दी गई, जिसके बाद नीचे से ऊपर तक एनकाउंटर की कहानी गढ़ दी गई। लाडपुर के जंगल में बेजान शरीर पर सिर्फ तीन फुट की दूरी से गोलियां चलाई गईं।

यह भी ख्याल नहीं रखा गया कि पोस्टमार्टम हुआ तो शरीर पर बने गोलियों के निशान कलई खोल सकते हैं। पुलिस को यह भी उम्मीद नहीं थी कि कंट्रोल रूम की लॉग बुक का रिकॉर्ड भी एनकाउंटर का सच खोल सकता है।

सीबीआई जांच हुई और आखिर पुलिस के दामन पर उसी धारा 302 का दाग लग गया, जिससे बचने के लिए रणबीर की जान ले ली गई।

रणवीर को न्याय मिले, हमें इंसाफ

मीनाक्षी, वंदना, शुभम, नेहा, सोबिया....। फेहरिस्त काफी लंबी है। सबके घर-परिवार अलग, लेकिन दर्द एक। सबकी आंखों में आंसू और इन आंसुओं की एक ही पुकार, ‘साहब, हम तबाह हो गए हैं।

सब खत्म हो गया। परिवार टूट चुका है। रणबीर को बेशक न्याय मिलना चाहिए, लेकिन हम बेकसूरों को भी इंसाफ दिया जाए।’

रणबीर एनकाउंटर मामले में दोषी पांच सिपाहियों के परिजन शनिवार रात डीजीपी बीएस सिद्धू से मिले तो माहौल गमगीन हो गया।

महिलाएं, बच्चे इस कदर फूट-फूटकर रोने लगे कि महिला पुलिसकर्मियों को उन्हें संभालना मुश्किल हो गया। डीजीपी ने परिजनों को मामले में जरूरी मदद का भरोसा दिलाया।
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18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया

दिल्ली में सीबीआई की विशेष अदालत ने रणबीर एनकाउंटर में दून के 18 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। इसके बाद उनके परिजन सदमे में हैं।

शुक्रवार को डीजीपी सिद्धू ने पूरा फैसला आने के बाद अपील करने की बात कही थी। इससे परिजनों में कुछ उम्मीद जगी है।

शनिवार देर शाम दोषी सिपाही चंद्रपाल, सौरभ नौटियाल, मोहन राणा, विकास बलूनी, संजय रावत के परिजन डीजीपी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। गोद में छोटे बच्चों को उठाए महिलाएं डीजीपी के सामने आते ही बिलख पड़ीं।

बच्चों की आंखों से भी झरने बहने लगे। चंद मिनटों में ही डीजीपी आफिस का माहौल गमगीन हो गया। सिपाही चंद्रपाल की बेटी वंदना ने डीजीपी से सवाल किया, ‘अंकल पापा कब आएंगे’ तो डीजीपी भी भावुक नजर आए।

परिजनों ने कहा कि पांचों सिपाही बेकसूर थे। उन्हें बाद में एनकाउंटर की लिखा पढ़ी में शामिल किया गया। सबका यही दर्द था कि उनके परिवार पांच साल तक दर्द झेलते रहे, लेकिन विभाग ने सुध नहीं ली।

उनका कहना था कि रणबीर के परिजनों को न्याय जरूर मिलना चाहिए, लेकिन उनके साथ हो रही नाइंसाफी पर भी गौर किया जाए। डीजीपी सिद्धू ने परिजनों को पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया। कहा कि कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
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