देहरादून जिले में 18-44 आयु वर्ग के वयस्कों के लिए को वैक्सीन लगभग खत्म हो गई है। ऐसे युवा अब परेशान हैं कि उनको वैक्सीन कब लगेगी। पोर्टल पर भी वह स्लॉट न मिलने के कारण परेशान हैं। कई युवाओं को 11 जून को दूसरी खुराक का मैसेज प्राप्त हुआ है, पर कोवैक्सीन कहीं उपलब्ध नहीं है।
दरअसल, उतराखंड में 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण दस मई को शुरू हुआ था। अब तक राज्य में इस आयु वर्ग के चार लाख 34 हजार 434 व्यक्तियों को टीका लग चुका है। कुछ दिन पहले वैक्सीन की कमी के कारण इस आयु वर्ग का टीकाकरण ठप हो गया था। अब टीकाकरण तो दोबारा शुरू हो गया है, मगर शुरुआती चरण में कोवैक्सीन लगवा चुके युवाओं को सामने दूसरी खुराक का संकट खड़ा हो गया है।
कोवैक्सीन की दूसरी खुराक 28 से 42 दिन के बीच लगती है। फिलहाल 18-44 आयु वर्ग के व्यक्तियों को सिर्फ कोविशील्ड लग रही है। ऐसे में कोवैक्सीन की पहली खुराक ले चुके युवा परेशान हैं। कि उन्हें अगली खुराक वक्त पर लग भी पाएगी या नहीं। इधर, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित का कहना है कि जिन्हें पहली खुराक लगी है, उन्हें दूसरी खुराक लगाना हमारी प्राथमिकता है। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। दूसरी खुराक 28 से 42 दिन के बीच लगती है। इसके लिए व्यवस्था बनाई जा रही है।
दिव्यांगजनों को टीका लगवाने में मदद करेगा विभाग
जनपद देहरादून में 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग एवं बुजुर्ग दिव्यांग लाभार्थी जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं तथा उनकी मदद के लिए घर पर कोई नहीं है, ऐसे लाभार्थियों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा देने की पहल की है। इस हेतु लाभार्थियों को स्मार्ट सिटी के पोर्टल परा जाकर लिंक
https://dsclservices.org.in/vaccine-registration पर स्वयं को पंजीकरण कराना होगा तथा पंजीकरण के समय पहचान पत्र एवं दिव्यांगता पत्र अपलोड करना होगा। पंजीकरण करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें संपर्क करेगी एवं टीकाकरण करवाने में उनकी मदद करेगी।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित ने बताया कि प्रशासन द्वारा यह पहल की गयी है ताकि कोई भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित ना रह जाए। आम जनता से अपील है कि वे अपने आस-पड़ोस में निवासरत दिव्यांगजन लाभार्थियों तक यह सूचना पहुंचायें एवं उन्हें पोर्टल पर पंजीकरण करने में सहायता करें। पंजीकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग उनके टीकाकरण की व्यवस्था करेगा।- मनीष भट्ट