उत्तराखंड में अक्तूबर माह के दौरान कोरोना के मामलों में करीब 31 प्रतिशत की कमी आई है। यह खबर राज्य के लोगों के लिए निसंदेह राहत वाली है। लेकिन कोरोना की इस राहत में हमें खतरे की आहट नहीं सुनाई दे रही है। फेस्टिव सीजन की मस्ती में टूट रहे नियम कायदों से प्रदेश सरकार चिंतित है।
प्रदेश में कोरोना को लेकर चिंता करने की आवश्यकता इसलिए भी है कि राज्य में कोरोना से मरने वालों की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। राष्ट्रीय औसत 1.49 प्रतिशत तुलना में राज्य में कोरोना से मारे जाने वालों की दर 1.63 प्रतिशत है।
सियासी कार्यक्रमों में भी ढिलाई
सत्तारूढ़ भाजपा से लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में भी कोरोना की रोकथाम के लिए जरूरी नियम कायदों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। खासतौर पर सामाजिक दूरी के नियम की पूरी तरह से अवहेलना हो रही है। इसकी ताजा मिसाल राजभवन में कांग्रेस का कूच, विधानसभा में राज्यसभा का चुनाव और आम आदमी पार्टी व यूकेडी के कार्यक्रमों में कई कार्यकर्ता मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने के नियम कायदों की अनदेखी करते देखे गए हैं।
अनलॉक के दौरान गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन हर हाल में होना चाहिए। यदि हम यह सोच रहे हैं कि कोरोना खत्म हो गया तो यह हमारी सबसे बड़ी भूल है। हमें फेस्टिव सीजन में खास सावधानी बरतनी है। मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का हर हाल पालन करना होगा। अन्यथा केरल, मिजोरम और दिल्ली उदाहरण हैं, जहां केस बढ़े हैं।
- अनूप नौटियाल, संस्थापक, सोशल डेवलमेंट फॉर कम्युनिकेशन फाउंडेशन