मजल बोर साइट यूपीवी 125 पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। एल्यूमिनियम अलॉय से बना यह उपकरण लगभग साढ़े चार किलोग्राम का है। इसका मूल काम टैंक की गन को अलाइमेंट (सीधाई) देकर दृष्टि प्रदान करने का होता है।
इसकी क्षमता की अगर बात करें तो यह विदेशी मजल साइट से भी ज्यादा सटीक होगी। इससे टार्गेट को 13 गुना तक मैग्नीफाइ (बड़ा) कर देखा जा सकता है। इसकी लागत आयातित मजल साइट से आधी आई है। इसकी 300 यूनिट अगले साल मार्च तक सेना को मुहैया करानी है।
डे साइट टेलीस्कोप 4 एक्स
असाल्ट राइफल पर लगाए जाने वाला डे साइट टेलीस्कोप भी पूरी तरह भारत में ही विकसित किया गया है। इसे असाल्ट राइफल पर लगाने के बाद सैनिक अपने टार्गेट को चार गुना बड़ा कर देख सकते हैं। इससे उनकी सटीकता अधिक बढ़ जाएगी। मसलन, यदि किसी सैनिक को सामने खड़े दुश्मन के माथे पर निशाना लगाना है तो वह उसे चार गुना अधिक बड़ा कर देखकर सटीक निशाना लगा सकता है। झा ने बताया कि इसके लिए सेना की टेक्निकल बिड में फैक्टरी मौका पा गई है।
अब तक 7.62 असाल्ट राइफल पर बिना किसी जूम वाले साइट उपकरण लगाए जाते हैं। 4 एक्स टेलीस्कॉप अब तक का भारत में मौजूद सबसे उन्नत उपकरण है। जल्द ही फैक्टरी में 24 एक्स टेलीस्कोप भी तैयार कर लिया जाएगा। इसे राइफल पर लगाने के बाद टार्गेट को 24 गुना तक बड़ा कर देखा जा सकता है।
अब तक इजराइल और रूस था सोर्स
पीके दीक्षित के मुताबिक अब तक ये दोनों उपकरण ही बाहर से आयात किए जाते थे। इनमें मजल साइट का इकलौता सोर्स रूस था। टेलीस्कोप रूस और इजराइल दोनों देशों से मंगाए जाते थे। कुछ भारतीय कंपनियां भी विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इसे बना रही हैं। उनकी कीमत ऑर्डिनेंस में बने इस टेलीस्कॉप से बेहद अधिक है।