कोरोना की रोकथाम के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने औद्योगिक इकाईयों को दस प्रतिशत कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से कोविड टेस्ट कराने के आदेश जारी किया है। साथ ही औद्योगिक इकाईयों को प्रतिदिन कोरोना की अपडेट रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस पर औद्योगिक संगठन ने आदेश का विरोध किया है। लघु उद्योग भारती संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि इससे कर्मचारियों में भय का माहौल है। जिससे फिर से मजदूरों के पलायन होने की आशंका है। कहा कि औद्योगिक इकाईयां अपने खर्चे पर दस प्रतिशत कर्मचारियों का कोविड टेस्ट कराने में असमर्थ हैं। इसके लिए सरकार ईएसआई को निर्देश दे।
संगठन के प्रदेश महामंत्री विजय सिंह तोमर ने पत्र के माध्यम से कहा कि लॉकडाउन की मार से उद्योग धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी रोज नए-नए आदेशों से औद्योगिक क्षेत्रों में भय का माहौल बन रहा है। अब प्रशासन ने सभी औद्योगिक इकाईयों को अपने दस प्रतिशत कर्मचारियों का कोविड टेस्ट कराने का आदेश दिया है। बिना किसी कारण से टेस्ट कराने पर कर्मचारियों में भय का माहौल बन रहा है और इससे उनके पलायन की आशंका है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी इकाई में कोरोना मरीज मिलता है तो उस इकाई के कर्मचारियों की जांच होनी चाहिए, यह संगठन भी मानता है, लेकिन दस प्रतिशत कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से कोराना टेस्ट संभव नहीं है। अधिकतर इकाईयां अभी तक भी कोरोना के मार से नहीं उभर पाई हैं। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रभावित इकाईयों में कोरोना जांच के लिए ईएसआई को निर्देशित किया जाए। ईएसआई कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए अंशदान इकाईयों से लेता है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि इस प्रकार के आदेशों पर तत्काल रोक लगाई जाए। जिससे कि भयमुक्त होकर औद्योगिक इकाईयां काम कर सकें।