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उत्तराखंड में कोरोना: गुरुवार को मिले सात नए संक्रमित, 200 से कम पहुंची सक्रिय मरीजों की संख्या

Thu, 30 Sep 2021 06:46 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

Corona Cases in Uttarakhand Today:  आठ जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, हरिद्वार, पौड़ी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। 
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कोरोना वायरस की जांच - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण से राहत मिलने लगी है। प्रदेश में बीते 24 घंटे में सात नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, एक भी मरीज की मौत नहीं हुई है। जबकि 48 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मामलों की संख्या 200 से कम पहुंच गई है। प्रदेश में अब 167 सक्रिय मरीज रह गए हैं।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, गुरुवार को 14950 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। आठ जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, हरिद्वार, पौड़ी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में एक-एक, रुद्रप्रयाग और टिहरी में दो-दो संक्रमित मरीज मिले हैं।

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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 343537 हो गई है। इनमें से 329876 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7394 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश की रिकवरी दर 96.02 प्रतिशत और संक्रमण दर  0.06 प्रतिशत दर्ज की गई है। 

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कोविड प्रभावित मजदूरों को राहत दे सरकार

राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से कोविड से प्रभावित मजदूरों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी कर उनके खाते में सीधे एकमुश्त राशि भेजने की मांग की है। साथ ही मजदूर विरोधी श्रम कानूनों को भी वापस लेने की बात दोहराई है। 

हरिद्वार में श्रवणनाथ नगर स्थित डेरा बाबा लच्छीराम में हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश सुंदरियाल ने कहा कि दो वर्ष से जारी कोरोना महामारी से मजदूर वर्ग सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। लॉकडाउन व निर्माण कार्यों पर रोक के चलते मजदूर वर्ग को लंबे समय तक बेरोजगारी का सामना करना पड़ा है। मजदूर परिवार का सामान्य खर्च भी नहीं चला पा रहे हैं। 

राष्ट्रीय प्रतिनिधि प्रदीप आहूजा ने कहा कि श्रम कानूनों में किए मजदूर विरोधी संशोधनों को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई को देखते हुए मजदूरों को मिलने वाली दैनिक मजदूरी को बढ़ाया जाए। संगठित व असंगठित मजदूरों की दशा सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
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