उत्तराखंड में कोरोना महामारी की तीसरी लहर रोकने के लिए स्वास्थ्य ढांचे में सुधार हुआ है। संक्रमितों के इलाज के लिए आईसीयू बेड में 53 प्रतिशत और ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट में 91 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोविड सैंपल जांच के लिए प्रदेश में 11 सरकारी और 26 निजी पैथोलॉजी लैब हैं।
सचिव स्वास्थ्य डॉ.पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि प्रदेेश में कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की रोकथाम के लिए सीमाओं पर सघन चेकिंग के साथ सैंपल जांच की जा रही है। कोरोना से निपटने के लिए प्रदेश में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पहले राज्य में कोरोना वायरस की जांच के लिए एक भी लैब नहीं थी। वर्तमान में 11 सरकारी और 26 प्राइवेट लैब हैं।
वर्तमान में आइसोलेशन बेड 31 हजार से अधिक हैं। जबकि आईसीयू की संख्या 1655 हो गई है। तीसरी लहर की आशंका देखते हुए आईसीयू में 53 प्रतिशत वृद्धि की गई है। इस समय राज्य के पास 1016 वेंटिलेटर और 22420 ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। सचिव ने कहा कि ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर को बढ़ा कर 9838 कर दिया गया है।
कहा कि जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। पीएसए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट में 91 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर ऑक्सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर की व्यवस्था कर दी गई है। वर्तमान में 2097 ऑक्सीजन बेड, नवजात शिशुओं के लिए 475 एनआईसीयू, बच्चों के लिए 465 पीआईसीयू चालू स्थिति में हैं।
उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही वन अनुसंधान संस्थान परिसर को पर्यटकों के लिए 11 दिसंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है। संस्थान निदेशक अरुण सिंह रावत की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य होने पर ही संस्थान परिसर को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
बता दें कि पिछले दिनों वन अनुसंधान संस्थान परिसर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण लेने आए कई वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद जिला प्रशासन की ओर से वन अनुसंधान संस्थान परिसर को माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित करने के साथ ही कोरोना गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया गया था। संस्थान परिसर एक सप्ताह के लिए बंद किया गया था लेकिन अब संस्थान परिसर को पर्यटकों के लिए 11 दिसंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है।
निदेशक अरुण सिंह रावत ने बताया कि संस्थान में सिर्फ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। यदि विशेष परिस्थितियों में किसी को संस्थान परिसर में आना है तो उसे बाकायदा अनुमति लेनी होगी।