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देहरादून के होटल में तीन दिन रुकी महिला मिली कोरोना पॉजिटिव, फरीदाबाद पहुंच चुका दंपती

Fri, 20 Mar 2020 11:10 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • देहरादून के जाखन के होटल में ठहरा था दंपती
  • पुलिस की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग ने होटल को किया सेनेटाइज
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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देहरादून के एक होटल में ठहरी महिला कोरोना पॉजिटिव पाए जाने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। महिला और उनके पति अब फरीदाबाद पहुंच चुके हैं। इसके बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने होटल में अग्रिम आदेशों तक किसी भी प्रकार की आवाजही पर रोक लगा दी है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उक्त महिला के संपर्क में आए समस्त लोगों को चिन्हित कर आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं। 

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महिला के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरे होटल को सेनीटाइज कराया। साथ ही होटल के कर्मचारियों को 14 दिन के लिए होम कोरेंटाइन कर दिया गया है।

पुलिस सूचना के मुताबिक, हाल ही में दंपती स्पेन की यात्रा कर लटी थी। इसके बाद वह दंपती देहरादून में जाखन स्थित होटल में नौ से 11 मार्च तक ठहरा था। 11 मार्च को यह दंपती वापस फरीदाबाद चला गया। इस बीच पता लगा कि महिला में कोरना के लक्षण पाए गए हैं। उसका सैंपल भी जांच के लिए भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसकी सूचना फरीदाबाद के प्रशासन द्वारा देहरादून जिला प्रशासन को दी गई ।
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इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम ने शुक्रवार सुबह होटल पहुंचकर सबसे पहले विजिटर रजिस्टर खंगाला। उसके बाद उस कमरे को बंद कर दिया गया जिसमें दंपती ठहरा था। टीम ने होटल में उस अवधि और उसके बाद ठहरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई।

साथ ही दंपती को भोजन आदि सेवाएं देने वाले दो कर्मचारियों को घर भेजकर वहीं रहने के लिए कहा। साथ ही होटल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं किलगातार होटल में साफ-सफाई के कराते रहें। हालांकि इस संबंध में कोई भी अधिकारी आधिकारिक तौर पर बोलने को तैयार नहीं है।

आईआरएस एक्टिवेट, प्रशासन अलर्ट 

देहरादून के जिलाधिकारी ने जिले के आईआरएस (इंटिग्रेटिड रेस्पांस सिस्टम) को एक्टिवेट करने के निर्देश दिए हैं ताकि समय रहते किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और मंदिरों व मस्जिदों में भीड़ कम करने की अपील की है। 

डीएम डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस वायरस से बचाव सिर्फ जागरुकता से ही हो सकता है। प्रशासन अपने स्तर से सारी तैयारियां कर रहा है। सुभारती मेडिकल कॉलेज को आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा दस के तहत अधिग्रहित कर इसे कोरोना केयर यूनिट बनाया गया है। इसके अलावा क्षेत्र के एक होटल को कोरेंटाइन यूनिट के तौर पर अधिग्रहित कर लिया गया है। 

उन्होंने बताया कि आईआरएस को पूरी तरह से शुरू कर दिया गया है। इस पूरी आपदा में सेवाएं डॉक्टर देंगे लेकिन सुरक्षा का दायित्व पुलिस विभाग पर रहेगा। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और एयरपोर्ट पर सोडियम क्लोराइड के छिड़काव के आदेश दिए गए हैं।
 
इसके अलावा चौक चौराहों और मलिन बस्तियों में भी इस घोल के लगातार छिड़काव को कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार का वायरस न पनप सके। मंदिर मस्जिद धार्मिक मामला है। लिहाजा, वहां भी लोगों को कम से कम संख्या में जाने की सलाह दी जा रही है, ताकि अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके। 

देहरादून से दो और ट्रेनों का संचालन बंद

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए देहरादून से दो और ट्रेनों का संचालन अगले आदेशों तक रद्द कर दिया गया है। इनमें देहरादून-नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस और दून-उज्जैन के बीच चलने वाली उज्जैनी एक्सप्रेस शामिल है।
 
उज्जैनी एक्सप्रेस पहले ही 31 मार्च तक अन्य कारणों से कैंसिल थी। जबकि शताब्दी एक्सप्रेस का संचालन कल शनिवार से रद्द किया जाएगा। इससे पहले रेलवे देहरादून-कोटा के बीच चलने वाली नंदा देवी एक्सप्रेस और देहरादून से काठगोदाम के बीच चलने वाली दून नैनी जनशताब्दी एक्सप्रेस को पहले ही रद्द किया जा चुका है। दून-नैनी जनशताब्दी एक्सप्रेस 21 मार्च से अगले आदेश तक नहीं चलेगी। यह जानकारी स्टेशन निदेशक गणेश चंद ठाकुर ने दी।

हरिपुर कालसी में महिला में मिले कोरोना के लक्षण

यूएसए से लौटे परिजनों के संपर्क में आने के बाद हरिपुर कालसी निवासी एक महिला में कोरोना संक्रमण के लक्षण मिले हैं। एहतियात के तौर पर महिला को 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से देहरादून में बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। महिला के सैंपल को जांच के लिए भेजा जा रहा है। 

महिला हरिपुर कालसी में अकेले ही रहती है। उसके पति चंडीगढ़ में जॉब करते हैं। महिला के कुछ रिश्तेदार यूएसए में रहते हैं। बीते सात मार्च को वह यूएसए से उसके पास रहने के लिए हरिपुर कालसी पहुंचे। 14 मार्च तक वह महिला के पास हरीपुर में ही रहे। इसके बाद वह लौट गए। 18 मार्च को महिला को सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत हुई। इसके बाद वह जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालसी पहुंची।

जहां महिला ने यूएसए से आए परिजनों के साथ रहने की बात डॉक्टरों की बताई। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया। शुक्रवार को एहतियात के तौर पर महिला को स्वास्थ्य जांच के लिए देहरादून ले जाया गया। जहां उसे अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया।

प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि महिला के मोहल्ले में रहने वाले लोगों को मास्क बांटे गए हैं। लोगों को अतिरिकत सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग भी क्षेत्र में विशेष निगरानी रखे हुए है। 
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25 ट्रेनी आईएफएस अधिकारियों की कोरोना नहीं 

विदेश भ्रमण से लौटे इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी के ट्रेनी आईएफएस अधिकारियों में से तीन के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की खबरों के बीच राहत देने वाली खबर है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिन 28 ट्रेनी अधिकारियों के सैंपल लिए गए थे। उनमें 25 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इससे संस्थान अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है। संस्थान की ओर से इस संबंध में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी गई है। 

अकादमी के एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि जिन 28 ट्रेनी अधिकारियों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, उसमें बाकी 25 अधिकारियों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। वहीं संस्थान में प्रशिक्षण ले रहे अधिकारियों को वायरस का संक्रमण न हो इसके लिए पूरे परिसर को सेनेटाइज किया जा रहा है। संस्थान के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ही राज्य सरकार के स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम निगरानी कर रही है।

अवस्थी ने बताया कि संस्थान को पूरी तरह सेनेटाइज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम के साथ ही निजी कंपनियों की भी मदद लेने की योजना बनाई गई लेकिन प्रशासन की ओर से लॉक डाउन लागू होने की वजह से निजी कंपनियों के विशेषज्ञों को प्रवेश की अनुमति नहीं पा रही है। 

ट्रेनी अधिकारियों के परिजनों को आने से रोका 
एकेडमी की ओर से ट्रेनी आईएफएस अधिकारियों के परिजनों को दून आने से रोक दिया गया है। अवस्थी का कहना है कि परिजनों के आने से अफरातफरी की स्थिति बन सकती है। फोन पर परिजनों को आश्वस्त कर दिया गया है कि सभी ट्रेनी अधिकारियों को सुरक्षित रखा गया है और उनका बेहतर तरीके से इलाज कराया जा रहा है।
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