दून अस्पताल के तीन कोविड वार्ड में सामान्य मरीजों का इलाज चल रहा है। इससे संक्रमित मरीजों को अस्पताल में इलाज कराने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उधर एकदम से कोरोना के मामलों में तेजी आने से कोविड वार्ड की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में सामान्य रोगों के मरीजों को अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने पर ध्यान देने की जरूरत है। दून कोविड अस्पताल में 350 बेड की व्यवस्था है।
ओपीडी के बाहर लंबी लाइन
दून अस्पताल के फ्लू ओपीडी के बाहर शुक्रवार को लोगों की लंबी लाइन देखने को मिली। ओपीडी के बाहर लोगों की लाइन लगने से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो रहा था।
नर्सिंग कॉलेज की 12 छात्राओं को भेजा घर
चंदरनगर स्थित स्टेट नर्सिंग कॉलेज की 12 छात्राओं को शुक्रवार को उनके घर भेज दिया गया। सीएमओ कार्यालय से अनुमति के बाद उन्हें घर भेजने का फैसला लिया गया। वहीं, 11 संक्रमित छात्राएं अभी हॉस्टल में हैं। इसके लिए कॉलेज परिसर में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। 16 छात्राओं की जांच रिपोर्ट का अभी इंतजार किया जा रहा है। एहतियातन इन सभी छात्राओं को आइसोलेट किया गया है।
कोरोना के मामलों में लगातार होती हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जिलाधिकारी ने रायपुर स्टेडियम में 500 बेड बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सभी कोविड अस्पतालों को भी बेड बढ़ाने को कहा है। साथ ही कुंभ ड्यूटी से लौटने वाले सभी अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, पीआरडी व होमगार्ड की कोरोना जांच की बात कही है।
जिलाधिकारी कार्यालय स्थित ऋषिपर्णा सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने प्रशासन, पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक ली। डीएम ने संक्रमण रोकथाम के लिए कोविड केयर सेंटर, पेड कोविड केयर सेंटर बनाने की बात कही।
साथ ही सभी सेंटरों में आवश्यक उपकरणों, दवाओं, सुविधाओं, केंद्र सरकार आईसीएमआर और राज्य सरकार की गाइड लाइन का पालन कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा आशारोड़ी, कुल्हाल और रायवाला में प्रदेश के बाहर से आने वाले यात्रियों की रैंडम सैंपलिंग और ट्रैवल हिस्ट्री जानकर डाटा एंट्री के भी निर्देश दिए।
एम्स ऋषिकेश के डॉ. मधुर उनियाल और डॉ. शेखर ने बताया कि एम्स में कोविड मरीजों के उपचार की जानकारी साझा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, सीडीओ नितिका खंडेलवाल, एसपी क्राइम प्रकाश चंद्र, एडीएम प्रोटोकॉल गिरीश गुणवंत, नोडल अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी दिनेश चौहान, एसडीएम सदर गोपाल राम बिनवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपशिखा रावत आदि मौजूद रहे।
राजधानी दून के एक बड़े निजी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से गलत शव देने का मामला सामने आया है। मामला शहर के एक निजी अस्पताल का है। अस्पताल प्रशासन की ओर से दिए गए गलत शव का अंतिम संस्कार के समय पता चला। शव के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
शास्त्रीनगर निवासी अविरल ने बताया कि बीते कुछ दिनों पहले उनके पिता और माता को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। कुछ दिन बाद माता की तबीयत ठीक होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन पिता की हालत नाजुक बताते हुए उन्हें छुट्टी नहीं दी गई।
बीते बृहस्पतिवार को अस्पताल प्रशासन की ओर से सूचना मिली कि पिताजी का निधन हो गया है। अस्पताल से शव को लाने के बाद अंतिम संस्कार के दौरान पता चला कि शव किसी और व्यक्ति का था।
एंबुलेंस न मिलने पर हंगामा
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थिति बेकाबू होती जा रही है। मरीजों का पंजीकरण, सैंपल जांच, भर्ती करने से लेकर मृतकों की सूचना देने और एंबुलेंस की व्यवस्था करने तक में कर्मचारियों और संसाधनों की भारी कमी सामने आ रही है।
शुक्रवार को भी दो मृतकों के परिजनों ने समय पर उनके मरीज के मौत की सूचना न देने और एंबुलेंस की समय पर व्यवस्था न होने पर अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों ने आरोप था कि घंटों इंतजार करने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई। संवाद