रुड़की में नए खुले एआरटीओ दफ्तर में भले ही अभी विभाग से जुड़े सारे काम शुरू नहीं हो पाए हों, लेकिन दलालों का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
दलालों ने सजा ली दुकानें
दफ्तर के सामने ही दलालों ने दुकानें सजा ली हैं। इन दुकानों में बैठे लोग फरियादियों को झांसे में लेकर फीस से तीन गुना अधिक रकम वसूल रहे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों के दफ्तर पहुंचने से पहले ही ये लोग यहां पहुंच जाते हैं।
वहीं, अधिकारी दफ्तर में दलालों की सक्रियता से इंकार कर रहे हैं, जबकि तस्वीरें गवाह हैं कि दफ्तर के बाहर किस तरह दुकानें सजी हुई हैं।
रुड़की-दिल्ली हाईवे पर खुले एआरटीओ कार्यालय में 29 अगस्त से कामकाज शुरू हो गया था, लेकिन अधिकारियों-कर्मचारियों की हीलाहवाली के कारण फरियादियों को कम दलालों को इसका ज्यादा लाभ मिलता दिख रहा है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने कार्यालय का जायजा लिया तो दलालों की सक्रियता सामने आ गई।
पूर्वाह्न 11:30 बजे तक एआरटीओ प्रशासन कार्यालय में नहीं पहुंचे थे। कुछ कर्मचारी वहां मौजूद थे, लेकिन डीएल बनवाने के लिए लाइन में काफी देर से खड़े फरियादियों के आवेदन लेना उन्होंने मुनासिब नहीं समझा।
बाद में एआरटीओ दफ्तर पहुंचे तो कर्मचारियों ने फार्म लेने शुरू किए। लेकिन इससे पहले ही बाहर सक्रिय कुछ दलाल लोगों से आवेदन और सुविधा शुल्क लेते नजर आए। कुछ लोगों का कहना था कि कर्मचारी उपभोक्ताओं का दलालों के पास जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
डीएल की फीस 400, ले रहे 1200
हल्के वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने के लिए सरकारी फीस मात्र 400 रुपए हैं लेकिन एआरटीओ कार्यालय में सक्रिय दलाल इसके लिए 1200 रुपए वसूल रहे हैं। सूत्रों की मानें, तो बाकी के 800 रुपए में दलालों और उनके कृपापात्रों का शेयर रहता है।
कार्यालय के सामने ही सजीं दुकानें
एक तरफ तो परिवहन मंत्री प्रदेश के एआरटीओ कार्यालयों में दलालों पर अंकुश लगाने का दावा कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनके गृह जनपद में ही इस पर अंकुश नहीं लग पाया है। नए खुले कार्यालय के सामने ही चंद कदमों पर दलालों ने अपनी दुकानें सजा रखी हैं।
यहां सुबह से ही उपभोक्ताओं से डीलिंग शुरू कर दी जाती है। अधिकारी रोजाना यहां से आते-जाते हैं, लेकिन क्यों उनकी नजर इन दुकानों पर नहीं पड़ती है? सवाल यह भी है कि आखिर यह दुकानें किस के कहने पर सजाई गई हैं।
अधिकारी-कर्मचारी शायद दलालों का लाभ पहुंचाए जाने के लिए ही लापरवाही कर रहे हैं, अगगर यूं ही चलता रहा तो कार्यालय का कोई लाभ नहीं होगा।
- जावेद, नगला इमरती
नया कार्यालय खुलने से थोड़ी अव्यवस्थाएं हो रही हैं, लेकिन फिर भी काम को व्यवस्थित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी दलाल के दफ्तर में घुसने पर पाबंदी है। लोगों को चाहिए कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति के बहकावे में न आएं जो ज्यादा पैसा लेकर या शॉर्टकट से काम कराने की बात करता हो। सीधे विभाग के अधिकारी और कर्मचारी से ही बात करें। ज्यादा पैसा मांगने वालों की शिकायत करें उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दलालों की दुकानें खुलने की बात मेरे संज्ञान में नहीं हैं ऐसा है तो उन्हें हटवा दिया जाएगा।
- शैलेष तिवारी, एआआरटी, रुड़की