उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के मामले में कांग्रेस द्वारा नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल की गई अर्जी पर अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गजों ने सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी अनुच्छेद 356 को अदालत में चुनौती दी।
बताया गया कि न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने कांग्रेस की याचिका स्वीकार की जिसके बाद आगे की सुनवाई शुरू हुई। दो बजे लंच के बाद अदालत ने मंगलवार को लिए सुनवाई टाल दी। सुबह करीब साढ़े दस बजे हाईकोर्ट में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के संबंध में कांग्रेस द्वारा दाखिल अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई जो दोपहर करीब तीन बजे तक चली।
रविवार को दिल्ली में पत्रकारों को जानकारी देते हुए पार्टी प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ पार्टी हाईकोर्ट जाएगी और राष्ट्रपति शासन को वापस लेने के लिए माननीय न्यायालय से निवेदन करेगी। उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने जाने की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सोमवार को दिल्ली से नैनीताल पहुंचे। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का भी कहना था कि सरकार हाईकोर्ट जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस दूसरे मंचों और जनता की अदालत में भी जाएगी।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद कांग्रेस ने न्यायिक विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया था। इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के संबंध में निर्णय लिया गया।