तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का अनावरण कर दिया गया।
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तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा हर की पैड़ी पर लगाने का पहले तो तीर्थ पुरोहितों ने विरोध किया। बाद में इसे मायापुर में शंकराचार्य चौक के पास स्थापित करना तय हुआ को मंगलवार रात संत विरोध में उतर आए। रातभर चले विरोध का असर यह रहा कि तड़के करीब तीन बजे शंकराचार्य चौक के पास से प्रतिमा को हटाकर प्रशासन डामकोठी ले गया। वहीं तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक अतिथियों ने उसका अनावरण किया। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अलंकरण तो हो गया, लेकिन प्रतिमा लगेगी कहां?
बुधवार को होने वाले अनावरण समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा यूपी, महाराष्ट्र, मणिपुर समेत कई राज्यों के राज्यपालों को शामिल होना था। लेकिन रात में प्रतिमा लगाने का संतों ने विरोध कर दिया तो प्रशासन ने स्थिति को भांपते हुए सभी अतिथियों को वस्तु स्थिति से अवगत कराया।
एक बार तो ऐसा लगने लगा था कि कार्यक्रम स्थगित करना पड़ेगा। लेकिन यूपी के राज्यपाल राम नाईक और मेघालय के राज्यपाल षणमुगम नाथन के हरिद्वार पहुंचने के चलते प्रतिमा अनावरण के बजाय डामकोठी में अलंकरण समारोह कराने का तात्कालिक निर्णय लिया गया।
संतों से तरुण विजय ने की क्षमा याचना
तरुण विजय
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बुधवार सुबह उल्लास के साथ अलंकरण समारोह तो निपट गया, लेकिन प्रतिमा स्थापित कहां होगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है। राज्यपाल राम नाईक का कहना था कि प्रतिमा के विरोध का कोई औचित्य नहीं है। जगह की व्यवस्था करना राज्य सरकार और प्रशासन का काम है।
सांसद तरुण विजय ने भी रास्ता निकलने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा ऐसी जगह स्थापित की जाएगी, जहां किसी को आपत्ति न हो। जिला प्रशासन ने भी जल्द ही प्रतिमा की स्थापना समुचित स्थान पर करने की बात कही है।
तिरुवल्लुवर की प्रतिमा लगाने का संतों की ओर से विरोध करने पर सांसद तरुण विजय ने संत समाज से क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि उनका आशय किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। जिस जगह मूर्ति स्थापित होनी थी, वह जगह उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें प्रदान की थी। संत समाज को यदि उनकी किसी बात से ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए क्षमा याचना करते हैं। विरोध को लेकर कहा कि उन्होंने सभी लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया था। हो सकता है इस दौरान कहीं संवादहीनता रह गई हो।