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रावत ने बदले तेवर, PM को भेजा खत, बजट नहीं दिया तो अपनाएंगे ये रास्ता

Thu, 16 Jun 2016 08:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
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एक बार फिर मुख्यमंत्री ने बजट का ताला खोलने का रोना प्रधानमंत्री के सामने रोया है, मगर इस बार अंदाज थोड़ा अलग मालूम पड़ रहा है। नरेंद्र मोदी को भेजी गई ताजा चिठ्ठी में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पहले तो राज्य के खराब हालातों का जिक्र किया है, उसके बाद कोर्ट जाने या फिर विधानसभा में दोबारा बजट पास कराने की बात कही है। इन दो विकल्पों के अपनाने की स्थिति में जो असर आएगा, उसका भी जिक्र मुख्यमंत्री ने बड़े सधे शब्दों के साथ किया है।
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पत्र में मुख्यमंत्री ने सियासी संकट का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में अनेक मौके ऐसे आए जब राजनीति और शासन की दिशाएं आरोप-प्रत्यारोप के भंवर में फंसी हैं। यह हमारा सौभाग्य है जब भारत का लोकतंत्र ऐसे संक्रमण काल में और अधिक मजबूत होकर समम्मानित हुआ है।

जनसंख्या के आधार पर देश के सौवें हिस्से से भी छोटा है। विधानसभा में बीती 18 मार्च को 40422.20 करोड़ का आय-व्यय तथा विनियोग विधेयक पारित हुआ, जिसे राज्यपाल ने राष्ट्रपति को भेज दिया था। इस बीच 28 मई को राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त होने के क्रम में उत्तराखंड विनियोग (लेखानुदान) अधिनियम 2016 पारित किया गया।
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राज्यपाल और गृह मंत्रालय की चिठ्ठियों का जिक्र

हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
इस अधिनियम के अंतर्गत मात्र 13642.43 करोड़ के आय व्यय को पारित किया गया, जिसकी समय सीमा 31 जुलाई तक है। राज्य को शेष 26779.76 करोड़ के बजट के उपयोग का अधिकार दिया जाए। इस क्रम में उन्होंने 27 मई को राज्यपाल और गृह मंत्रालय को भेजी गई चिठ्ठियों का भी जिक्र किया है।

साथ ही यह भी कहा कि 15 जून तक इस बाबत कोई निर्देश नहीं मिले हैं। ऐसे में एक विकल्प न्यायालय जाने और दूसरा विधानसभा जाकर मतदान के लिए प्रस्तुत होने का ही है। मुख्यमंत्री ने यह कहते हुए चेताया भी कि इन दोनों ही विकल्पों में संविधान में प्रदत्त केंद्र एवं राज्यों के संबंध और भारत के संघीय ढांचे की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है। यह भी कहा कि वे (प्रधानमंत्री) स्वयं मार्गदर्शन देकर इन्हें सुलझाना चाहेंगे।

16 की चिठ्ठी मीडया में 15 को
बजट रोके जाने को लेकर मुख्यमंत्री कई बार प्रेस कांफ्रेंस कर चुके हैं। हर बार वे केंद्र सरकार पर जानबूझकर बजट रोके जाने का आरोप लगाते हैं। मगर मोदी को लिखे गए ताजा पत्र को लेकर हैरानी इस बात की है कि पत्र में 16 जून की तिथि अंकित है, जबकि मीडिया में यह पत्र 15 की रात को ही लीक कर दिया गया। ऐसे में इस चिट्ठी को लिखे जाने पर यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि पत्र वाकई बजट की डिमांड को लेकर लिखा गया है या फिर इसे पब्लिसिटी स्टंट माना जाए।
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