पर्यटन सचिव बोले- क्षमता से अधिक यात्री पहुंचने से बिगड़ी व्यवस्था
सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने बताया कि ऑफलाइन पंजीकरण का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध करवाना है, लेकिन वहन क्षमता के अनुसार पंजीकरण फुल होने से काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन करना संभव नहीं है। चारों धामों में क्षमता से अधिक यात्री पहुंचने से पुलिस और प्रशासन को भीड़ को नियंत्रण करने में मुश्किल आ रही है।
ऑनलाइन पंजीकरण में भी स्लॉट नहीं
चारों धामों के लिए क्षमता से अधिक पंजीकरण होने के कारण यात्रियों को ऑनलाइन मोड में भी राहत नहीं मिल पा रही है। बता दें कि ऑनलाइन पंजीकरण तभी हो सकता है जबकि स्लॉट खाली हों। तीर्थयात्रियों को ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ऋषिकेश, हरिद्वार, यात्रा मार्ग पर कुल 20 केंद्रों में ऑफलाइन पंजीकरण किया जा रहा है।
17.24 लाख यात्री करा चुके पंजीकरण
इस बार चारधाम यात्रा के लिए अक्तूबर तक के लिए 17.24 लाख से अधिक यात्री पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि 6.71 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर सरकार ने वहन क्षमता के अनुसार ही प्रतिदिन यात्रियों का पंजीकरण कर दर्शन के लिए भेजने का निर्णय लिया है।
धाम पहुंचे श्रद्धालु
बदरीनाथ 197724
केदारनाथ 236669
गंगोत्री 130855
यमुनोत्री 106352
यात्री बोले- पंजीकरण होने तक यहीं रहेंगे
चारधाम यात्रियों के ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण पर रोक के बाद ऋषिकेश में करीब चार हजार यात्री फंस गए हैं। गुरुवार को सुबह से ही पंजीकरण बंद होने से यात्रियों ने पंजीकरण सेंटर के बाहर और प्रतिक्षालय में डेरा डाल लिया था। केदारनाथ जाने वाले करीब 1600 तीर्थयात्री, बदरीनाथ जाने वाले 1400 तीर्थयात्री, गंगोत्री जाने वाले 600 और यमुनोत्री जाने वाले 400 तीर्थयात्री आईएसबीटी परिसर, धर्मशालाओं और होटलों में ठहरे हैं। यात्री पंजीकरण काउंटर खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि जब तक उनका पंजीकरण नहीं होता, वो यहीं रहेंगे और इंतजार करेंगे। वहीं, जो तीर्थयात्री सरकारी नौकरी पर हैं, वह तय दिन की छुट्टी लेकर यात्रा पर आए हैं और पंजीकरण न होने से परेशान हैं। करीब 468 यात्री ऋषिकेश में बसों का इंतजार कर रहे हैं। दूसरे राज्यों से आए तीर्थयात्री ट्रेवल एजेंसी संचालकों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन एजेंसियों के पास भी पूरे ग्रुप को ले जाने के लिए पर्याप्त बसें नहीं हैं।