चारधाम यात्रा में यात्रियों की जान पर ड्राइवरों की नींद भारी साबित हो रही है। हालात यह हो गए हैं कि यात्रा के लिए वाहनों की भारी किल्लत है, जो वाहन उपलब्ध हैं, उनके चालक दिन-रात एक कर वाहन चला रहे हैं। प्रदेश में मई और जून दो माह ऐसे हैं, जब ड्राइवरों को नींद तक नसीब नहीं होती है।
वाहन चालक दिन-रात सड़कों पर यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह छोड़ने में व्यस्त हैं। क्योंकि, चारधाम यात्रा की वजह से इन दो महीनों में लाखों की संख्या में सैलानी देश के अलग-अलग हिस्सों से उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। यात्रा सीजन में अधिक पैसा कमाने की होड़ और वाहनों की कम संख्या के चलते यात्रियों का दबाव चालकों के लिए मुसीबत बन रहा है।
वह नींद से समझौता कर रहे हैं। परिवहन विभाग ने वैसे तो ड्राईवरों के आराम के लिए सख्त नियम बनाए हैं, लेकिन उनकी नींद की व्यवस्था और जांच ठीक से नहीं हो पा रही है।