जीर्णशीर्ण पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर का कोठा भवन एवं अधीनस्थ मंदिरों का पुनरोद्धार कार्य अगले तीन माह में शुरू हो जाएगा। इसी सप्ताह देहरादून से आर्केटेक्ट ऊखीमठ पहुंचकर ओंकारेश्वर मंदिर क्षेत्र का वृहद सर्वेक्षण कर नव निर्माण के लिए डिजायन तैयार करेगा। दो चरणों में होने वाले पुनरोद्धार कार्य के पहले चरण के लिए एक करोड़ रुपये भी जारी हो गए हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध व वाणासुर की पुत्री ऊषा के विवाह की साक्षी ऊखीमठ नगरी में स्थापित ओंकारेश्वर मंदिर का कोठा भवन व अधीनस्थ मंदिर जर्जर हो चुके हैं। लेकिन अब, इसके पुनरोद्धार के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य भी फरवरी 2022 से शुरू हो जाएगा। इसके लिए देवस्थानम बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2021/22 के लिए एक करोड़ की धनराशि जारी कर चुका है। दो चरणों में होने वाले निर्माण कार्यों में पहले चरण में ओंकारेश्वर मंदिर क्षेत्र खाली पड़ी भूमि का समतलीकरण व अन्य भूमि को खाली किया जाएगा।
पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर कोठा भवन व अधीनस्थ मंदिरों का पुनरोद्धार कार्य दो चरणों में होना है। सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस सप्ताह आर्केटेक्ट ऊखीमठ पहुंच रहे हैं, जो सर्वेक्षण कर डिजायन तैयार करेंगे। जिसके आधार पर पुनरोद्धार कार्य किए जाएंगे।
- अनिल ध्यान, अधिशासी अभियंता, चारधाम देवस्थानम बोर्ड
चौरंगी देवता मेले में देव डोलियों से आशीर्वाद लेने उमड़े श्रद्धालु
त्रिवार्षिक पौराणिक श्री चौरंगी देवता मेले में देव डोलियों से आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को मेले के चौथे दिन ग्राम लोदाड़ा में मेले का ग्राम देवता तामेश्वर, चौरंगी, भैरव देवता की मौजूदगी में भाजपा नेता लोकेंद्र बिष्ट ने शुभारंभ किया।
गाजणा पट्टी के चौंदियाट गांव, दिखोली, सौड़, लोदाड़ा व भेटियारा समेत पांच गांवों का संयुक्त श्री चौरंगी देवता मेला हर तीसरे साल आयोजित होता है। इसमें मेला क्षेत्र के प्रमुख आराध्य देव भगवान तामेश्वर, चौरंगी नाथ की डोली, श्री हलवा देवता, नागराजा की डोली, हरि महाराज का ढोल, खंडद्वारी माता की डोली के साथ हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। जिस गांव में यह मेला होता है, वहां मेलार्थियों के खाने-पीने की व्यवस्था ग्रामीण करते हैं। बुधवार को मेले में पहुंचे मुख्य अतिथि भाजपा नेता लोकेंद्र बिष्ट ने कहा कि गांव और ग्रामीण ही पहाड़ की संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि की कामना करते हुए मेला आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं।