पेयजल आपूर्ति को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाला उत्तराखंड का जल संस्थान विभाग अब बुजुर्गों को परेशान करने वाले विभागों में भी शुमार हो गया है।
पेंशन के लिए आना पड़ता है देहरादून
हाल यह है कि एक वृद्धा को 965 रुपए की पेंशन के लिए तीन सौ किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। पेंशन के लिए एक बार देहरादून आने में करीब ढाई हजार रुपये खर्चने भी पड़ते हैं।
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यानी करीब तीन माह का पेंशन। ऐसे में कोई क्या कर सकता है। गुहार पर गुहार लेकिन नहीं हुई सुनवाई। न विभाग ने ध्यान दिया और न ही बैंक ने। सब नियमों का हवाला देकर कर्तव्य से इतिश्री कर लेते हैं। ऐसे में खुद ही तोड़ निकाला।
पैसे और परेशानी से बचने के लिए साल में एक बार आने का निश्चय किया। लेकिन इस लिहाज से भी एक बार में तीन माह की पेंशन चली ही जाती है।
जूनियर फिटर के पद पर तैनात थे पति
कर्णप्रयाग से तीन किमी दूर घटगाड़ गांव निवासी वृद्धा जानकी देवी (62) को 965 रुपए की पेंशन के लिए देहरादून आना पड़ता है। जानकी के पति कलम सिंह जल संस्थान विभाग से जूनियर फिटर के पद से 31 दिसंबर 1998 को सेवानिवृत्त हुए थे।
तब विभाग में पेंशन विनियमावली 1984 के तहत पेंशन दी जाती थी। 14 मई 2011 को कलम सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी जानकी देवी को 26 नवंबर 2011 से अवशेष पेंशन के 965 रुपए मिलता है।
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जानकी का पेंशन खाता एसबीआई की धर्मपुर शाखा में है। पेंशन खाता कर्णप्रयाग शाखा में स्थानांतरित करने के लिए भी जानकी आवेदन कर चुकी हैं पर बैंक प्रबंधन ने नियमों की दुहाई देकर हाथ खड़े कर दिए। वहीं जल संस्थान विभाग का भी कहना है कि पेंशन लेने के लिए देहरादून ही आना पड़ेगा।
एक चक्कर और खर्च ढाई हजार
जानकी देवी को पिछले नवंबर माह में पेंशन लेने और अपना भौतिक सत्यापन कराने देहरादून आना पड़ा। घर घटगाड़ से तड़के 7.30 बजे रवाना होकर वृद्धा तीन किमी का पैदल सफर तय कर कर्णप्रयाग पहुंची।
कर्णप्रयाग से अपने बेटे के साथ बस से रात आठ बजे देहरादून पहुंची। यहां होटल में उन्हें कमरा लेना पड़ा। अगले दिन बैंक में ही आधा दिन निकल जाने के बाद उन्हें वापसी को न बस मिली और न ही कोई अन्य वाहन।
दूसरे दिन भी होटल में ही रुकना पड़ा। होटल का न्यूनतम किराया पांच सौ होने से उन्हें होटल में ही एक हजार रुपए देने पड़े।
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इसके अलावा 1400 रुपए (कर्णप्रयाग से देहरादून का एक यात्री का आने-जाने का किराया 700 रुपए) बस किराए और कम से कम दो सौ रुपए खाने में उन्हें खर्च करने पड़े।
इन्हें भी नापनी पड़ती मीलों दूरी
देवाल के झलिया, रामपुर,
तोरती, पिनाऊं, घेस सहित 15 से अधिक गांवों के पेंशनरों को देवाल पहुंचने
के लिए 8 से 17 किमी की पैदल दूरी तय करने के बाद 25 से 35 किमी सड़क का
सफर कर एसबीआई शाखा देवाल पहुंचना पड़ता है। यही स्थिति थराली के रुईसांण व
देवाल के उत्तरी कड़ाकोट सहित गैरसैंण क्षेत्र के खनसर क्षेत्र की भी है।
इस प्रकार तीन दिन का समय बर्बाद होने के साथ ही एक चक्कर में ही उन्हें कम से कम 2600 रुपए खर्च करने पड़े।मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं है। विभागीय सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन प्रकरण देहरादून से हल होते हैं। संबंधित पेंशन भोगी विभागीय स्तर पर आवेदन कर खाता देहरादून से नजदीकी बैंक शाखा में स्थानांतरित करा सकती है।
- जेपी जोशी, ईई जलसंस्थान विभाग चमोली (गोपेश्वर)
जल संस्थान के सर्विस रूल में ऐसा प्रावधान है कि विभाग से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पेंशन लेने के लिए देहरादून ही आना पड़ेगा। इस रूल की वजह से कई लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। जल्द ही बोर्ड बैठक करके इस मामले का उचित हल निकाला जाएगा।
- डीडी डिमरी, मुख्य महाप्रबंधक, जलसंस्थान
जल संस्थान के सेवानिवृत्त लोगों के पेंशन के लिए परेशान होने की जानकारी मेरे पास भी आई है। मामले पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। बहुत जल्द ही इस नियम को बदला जाएगा।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, पेयजल मंत्री