- केंद्र से पैसा मिला, फिर सरकार प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति नहीं दे पाई, काम लटक गए
- पुनर्निर्माण कार्यों के पैकेज में ऐसे काम भी शामिल कर दिए, जो आपदा में नहीं हुए क्षतिग्रस्त
- निर्धारित मानकों के विपरीत बजट खर्च कर डाला, निर्माण कार्यों में अत्यधिक छूट दे दी गई
- सिंचाई, वन, लोक निर्माण विभाग अपनी परिसंपत्तियों का सही आंकलन करने में रहे नाकाम
- पुनर्निर्माण कार्यों के नियोजन, निधि प्रबंधन में भारी कमी, वक्त पर पूरे नहीं हुए स्वीकृत कार्य
- निगरानी रखने और गुणवत्ता परखने को कोई केंद्रीकृत तंत्र बनाने की जहमत तक नहीं उठाई
- 10 सड़कें और पुल, दो पर्यटन अवस्थापना से जुड़े कार्य पांच साल बाद भी पूरे नहीं हो पाए
- मार्च 2018 तक तीन लघु जल विद्युत परियोजनाएं और 17 सार्वजनिक भवन भी नहीं बने
- वन क्षेत्र में पांच निर्माण कार्य पांच वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद शुरू नहीं हो पाए
- 246 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के सही प्रस्ताव न बनने से पैकेज का लाभ नहीं मिला
- पुनर्निर्माण में बनीं 61 प्रतिशत सड़कों की गुणवत्ता को लोक निर्माण विभाग ने माना कमजोर
9,296.89 करोड़ का पुनर्निर्माण पैकेज मांगा था प्रदेश सरकार ने केंद्र से
7,346 करोड़ के पैकेज को केंद्र सरकार ने जनवरी 2014 में दी थी मंजूरी
6,259.84 करोड़ का परिव्यय मध्यम व दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए मंजूर
4,617.27 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराई
3,708 करोड़ रुपये ही प्रदेश सरकार पुनर्निर्माण कार्यों पर खर्च कर सकी है
319.75 करोड़ रुपये विशेष आयोजन सहायता के लिए नहीं करा सके स्वीकृत