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उत्तराखंड: कैग ने आपदा पुनर्निर्माण में पकड़ा बड़ा 'गड़बड़झाला', रिपोर्ट में हुए 11 बड़े खुलासे

Sat, 23 Feb 2019 08:32 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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वर्ष 2013 की आपदा में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केंद्र ने जो पुनर्निर्माण पैकेज मंजूर किया था, प्रदेश सरकार उसका भी पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाई। करीब पांच साल में सरकार 2,551 करोड़ रुपये खर्च करने में पूरी तरह से फेल रही। केंद्र की विशेष आयोजनगत सहायता-पुनर्निर्माण योजना के तहत स्वीकृत 319.75 करोड़ रुपये की प्राप्ति के बावजूद राज्य सरकार ने धनराशि जारी नहीं की। इसका नतीजा यह रहा कि गौरीकुंड व केदारनाथ के बीच रोपवे का निर्माण नहीं कर पाई। 

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रिपोर्ट के मुताबिक पैसा जारी नहीं होने से न आश्रय सह गोदामों के निर्माणकार्य हो सके और न ही केदारनाथ टाउनशिप के दूसरे चरण के कार्य व अन्य धामों के विकास कार्यों में तेजी आ सकी। इतना ही नहीं इस पैकेज के तहत सरकार प्रभावित इलाकों के युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 10 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बनाने के लिए भी धनराशि स्वीकृत नहीं करा सकी।

वहीं, पुनर्निर्माण पैकेज के तहत बनीं 61 फीसदी सड़कों की गुणवत्ता को प्रदेश सरकार के ही लोक निर्माण विभाग ने कमजोर माना है। ये खुलासा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है। शुक्रवार को विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने यह रिपोर्ट सदन पटल पर पेश की।
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रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण पैकेज के तहत प्रदेश सरकार ने 3,708 करोड़ के जो कार्य किए, उनमें भी कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा धन स्वीकृति में देरी करने और कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ढिलाई बरतने से पुनर्निर्माण कार्यों पर काम समय पर शुरू नहीं हो सका।
 

कमियां जिनका कैग ने खुलासा किया

- केंद्र से पैसा मिला, फिर सरकार प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति नहीं दे पाई, काम लटक गए 
- पुनर्निर्माण कार्यों के पैकेज में ऐसे काम भी शामिल कर दिए, जो आपदा में नहीं हुए क्षतिग्रस्त
- निर्धारित मानकों के विपरीत बजट खर्च कर डाला, निर्माण कार्यों में अत्यधिक छूट दे दी गई
- सिंचाई, वन, लोक निर्माण विभाग अपनी परिसंपत्तियों का सही आंकलन करने में रहे नाकाम
- पुनर्निर्माण कार्यों के नियोजन, निधि प्रबंधन में भारी कमी, वक्त पर पूरे नहीं हुए स्वीकृत कार्य
- निगरानी रखने और गुणवत्ता परखने को कोई केंद्रीकृत तंत्र बनाने की जहमत तक नहीं उठाई
- 10 सड़कें और पुल, दो पर्यटन अवस्थापना से जुड़े कार्य पांच साल बाद भी पूरे नहीं हो पाए
- मार्च 2018 तक तीन लघु जल विद्युत परियोजनाएं और 17 सार्वजनिक भवन भी नहीं बने 
- वन क्षेत्र में पांच निर्माण कार्य पांच वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद शुरू नहीं हो पाए
- 246 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के सही प्रस्ताव न बनने से पैकेज का लाभ नहीं मिला
- पुनर्निर्माण में बनीं 61 प्रतिशत सड़कों की गुणवत्ता को लोक निर्माण विभाग ने माना कमजोर
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खर्च में फिसड्डी सरकार 

9,296.89 करोड़ का पुनर्निर्माण पैकेज मांगा था प्रदेश सरकार ने केंद्र से
7,346 करोड़ के पैकेज को केंद्र सरकार ने जनवरी 2014 में दी थी मंजूरी
6,259.84 करोड़ का परिव्यय मध्यम व दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए मंजूर
4,617.27 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराई
3,708 करोड़ रुपये ही प्रदेश सरकार पुनर्निर्माण कार्यों पर खर्च कर सकी है
319.75 करोड़ रुपये विशेष आयोजन सहायता के लिए नहीं करा सके स्वीकृत
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