कुट्टू का आटा का सांकेतिक फोटो
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व्रत में लोग कुट्टू के आटे का खूब उपयोग करते हैं। खुले आटे के इस्तेमाल की अवधि अधिकतम एक माह होती है। ऐसे में कुट्टू के आटे की खरीद और इसका इस्तेेमाल समझ परख कर करें।
हरिद्वार और रुड़की की घटना के बाद देहरादून में खाद्य सुरक्षा विभाग सतर्क हो गया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पीसी जोशी ने बताया कि शनिवार तक कुट्टू के आटे के चार नमूने जांच के लिए रुद्रपुर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। कुछ स्थानों से कुट्टू का आटा खराब होने की शिकायतें भी मिल रही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कुट्टू का आटा केवल व्रत व नवरात्र के सीजन में ही उपयोग होता है।
खुले आटे के इस्तेमाल की अवधि एक माह ही होती है। ऐसे में व्यापारी पुराना बचा आटा बेचते हैं। इसमें फंगल और इंसेक्ट ग्रोथ हो जाती है। ऐसे में उपभोक्ता उसकी उपयोग अवधि को देखकर ही आटा खरीदें। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी इस संबंध में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी व्यापारी के पास कुट्टू का आटा खराब पाया जाता है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
क्या है कुट्टू का आटा
कुट्टू को पहाड़ी बोली में ओगल भी कहा जाता है। इंग्लिश में इसे बकवीट कहते हैं। कुट्टू में पर्याप्त मात्रा में आयरन, सेलीमन व ग्लूटन होता है। कुट्टू का आटा डायबिटीज के मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह फाइबर और मिनरल से भरपूर होता है।
इन बातों का रखें ख्याल
- खुले में रखा आटा न लें।
- अगर आटे में फंगस लगी है तो उसे न लें।
- आटे में थोड़ा भी नमी लगे तो इसका इस्तेमाल न करें।
- इसे खाने से अगर थोड़ा भी तबीयत खराब लगे तो इसे खाना तत्काल बंद करें और समय पर डॉक्टर को दिखाएं।