उस समय बस की स्पीड़ 40 और 50 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रही होगी। एक यात्री को उतारने के लिए बस को दूसरे गियर में डालकर ब्रेक लगाए तो ब्रेक का पैडल अंदर घुसता चला गया। इसके बाद दो तीन बार फिर ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ढलान पर होने के कारण बस बेकाबू होती चली गई।
एक तरफ खाई थी और दूसरी तरफ चट्टान। यात्रियों को अलर्ट कर बस को चट्टान पर चढ़ाने में देर नहीं की। कुदरत का करम रहा, तमाम यात्रियों की जिंदगी बच गई।
नैनबाग के कांडी निवासी दिनेश रावत की आंखों में वो खौफनाक मंजर अब भी तैर रहा है। अमर उजाला से बातचीत में रावत ने पूरे घटनाक्रम का सिलेसिलेवार जिक्र किया। 16 साल से उत्तराखंड परिवहन निगम में संविदा बस चालक रावत कहते हैx उनके साथ पहली बार ऐसी अनहोनी हुई।