वेतन, पेंशन, सब्सिडी का खर्च बढ़ा, विकास के लिए धन की कमी
रिपोर्ट बताती है कि सरकार का प्रतिबद्ध खर्च जिसमें वेतन, पेंशन, सब्सिडी, ब्याज भुगतान शामिल है, बढ़ा है। 2018-19 से 2022-23 के मध्य सरकार ने प्रतिबद्ध खर्च में 21 प्रतिशत की वृद्धि की। जबकि राजस्व खर्च में इसी अवधि के दौरान 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे सरकार को विकास कार्यों के लिए धन की कमी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में सरकार का प्रतिबद्ध खर्च 21570 करोड़ था, जो 2022-23 में बढ़कर 26089 करोड़ हो गया।
पिछले पांच साल में वेतन पर सालाना खर्च 11525 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 13515 करोड़ तक पहुंच गया तो पेंशन का आंकड़ा पांच साल में 5396 करोड़ से 7181 करोड़ तक पहुंच गया। ठीक ऐसी वृद्धि सब्सिडी और ब्याज भुगतान में भी दिखाई दी है।
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864.32 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लटके
पिछले दो वर्षों के दौरान संबंधित विभाग 864.32 करोड़ रुपये की उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित अवधि में उपलब्ध करा पाए। रिपोर्ट में कैग ने इसका प्रमुखता से जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 तक 20.29 करोड़ के एक और 2022-23 में 844.03 करोड़ के 267 उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार प्रस्तुत नहीं किए। 31 मार्च 2022 तक 1390.08 करोड़ के 321 उपयोगिता प्रमाण पत्र बकाया थे।