बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से उत्तराखंड को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। गंगा नदी से सटे क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती से जहां गंगा स्वच्छ होगी। वहीं किसानों भी आमदनी बढ़ेगी। वर्तमान में नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा प्रदेश के सात जिलों में गंगा बेसिन में सटे 1237 गांवों में 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम चल रहा है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की घोषणा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की घोषणा की है। रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में प्रावधान किया गया। गंगा नदी से सटे पांच किलोमीटर की चौड़ाई के गलियारे में खेतीबाड़ी करने वाले किसानों की जमीनों पर प्राकृतिक खेती पर ध्यान दिया जाएगा। उत्तराखंड से ही गंगा का उदगम होता है। गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मकसद नदी को स्वच्छ बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाना है।
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बजट में प्राकृतिक खेती का प्रावधान करने से उत्तराखंड को ज्यादा फायदा मिल सकता है। नदी के तटीय क्षेत्रों में बसे गांवों में प्राकृतिक या जैविक खेती से किसानों की आर्थिकी भी मजबूत होगी। पिछले पांच सालों में उत्तराखंड में जैविक खेती का दायरा 50 प्रतिशत बढ़ा है। वर्तमान में 2.20 लाख हेक्टेयर में 4.75 लाख किसान जैविक खेती कर रहे हैं। 4500 जैविक कलस्टर पर काम चल रहा है। इसके अलावा छह हजार कलस्टरों के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है।
केंद्र सरकार ने बजट में गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के लिए महत्वकांक्षी योजना का प्रावधान किया है। तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से गंगा भी स्वच्छ होगी। साथ ही फसलों की उत्पादकता भी बढ़ेगी। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जन सहभागिता होनी जरूरी है।
-कल्याण सिंह रावत, पद्मश्री एवं मैती आंदोलन के संस्थापक