उत्तराखंड में तीन सीटों पर हुए उपचुनाव ने भाजपा को अंदर तक हिला दिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पांचों सांसद, प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री (संगठन) के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को सोमवार को दिल्ली बुलाया है।
माना जा रहा है कि उपचुनाव में हुई हार पर चर्चा होनी है और हार के कारणों को तलाशा जाना है। उपचुनाव की हार का धमक दिल्ली भी पहुंची। पार्टी में अंदरुनी उठापटक की बात भी दिल्ली दरबार में गूंज रही है।
दूरभाष पर नेताओं को बुलाया दिल्ली
रविवार की सुबह की दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कार्यालय से सभी नेताओं को दूरभाष पर सोमवार को दिल्ली पहुंचने की सूचना दी गई।
इन नेताओं के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की बैठक होनी है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में प्रदेश प्रभारी व केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी मौजूद रहेंगे।
जिन्हें दिल्ली से बुलावा आया है उनमें पौड़ी सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी, नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी, हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा, प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार का नाम शामिल हैं।
हार के सदमे से उबरने में समय लगेगा भाजपा को
उप-चुनाव में तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत से भाजपा सदमे में है। हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।
उधर, प्रदेश के प्रमुख नेताओं को दिल्ली दरबार में तलब किया गया है। फिलहाल स्थिति जितनी शांत दिख रही है उतनी है नहीं।
माना जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस हार के लिए जिम्मेदार नेताओं की जवाबदेही तय कर सकते हैं। कांग्रेस द्वारा उपचुनाव में दोनों सीटें जीतने के बाद विधानसभा में भाजपा का संख्याबल भी कम हो गया।
क्योंकि इन दो सीटों में से डोईवाला व सोमेश्वर भाजपा के कब्जे में थी। मगर अब दोनों ही कांग्रेस के पास चली गई।
फिलहाल शिकवे शिकायत का दौर शुरू हो गया है, हंगामा करने वालो को नोटिस जारी हो रहे हैं और दिल्ली कूच की तैयारी है। भितरघात को लेकर भाजपा में पहले से ही घमासान है।
परेशानी में हार का कारण तलाश रहे नेता
तीनों सीटों पर हार का कारण तलाश रहे नेताओं को भी पसीना छूट रहा है। सवाल यही है कि जब भितरघात हो रहा था तो प्रदेश नेतृत्व क्या कर रहा था।
उधर, त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली कूच करने की खबर भी मिल रही है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह अपने चुनाव को लेकर दिल्ली गए है या फिर निजी कार्यक्रम है।
दिल्ली बुलाए जाने वाले नेताओं में अभी प्रमुख नेताओं के नाम ही चर्चा में हैं। लेकिन इस बार लगता है तीनों सीटों पर चुनाव में मिली शिकस्त के लिए भाजपा के बड़े नेताओं की जिम्मेदारी भी फिक्स हो सकती है।
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