चुनाव अगर कहीं दिखता है तो वह सितारंगज में। शक्तिफार्म में हर घर पर झंडा और सड़क पर रैली, लाउडस्पीकर की धूम। यही शक्तिफार्म है जो इस समय सितारगंज के चुनाव की धुरी बनी हुई है।
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सितारंगज के एक लाख से अधिक मतदाताओं में से बंगाली समुदाय के करीब 33 हजार वोटों के लिए राजनीतिक दल घात-प्रतिघात, लुभाने और अपनी उपस्थिति को लगातार बनाए रखने के लिए जीजान से जुटे हैं। बुधवार को यहां भाजपा सांसद सुप्रीयो बाबुल ने जनसभा की तो बृहस्पतिवार को यहां राहुल गांधी पहुंच रहे हैं। वोटों के इस गणित में विकास की आवाज नैपथ्य में हैं और मतदाता खुलकर अपनी राय जाहिर करने से परहेज कर रहा है।
मतदान से छह दिन पहले सितारगंज राजनीतिक दलों के लिए अखाड़ा बन चुका है। कांग्रेस ने बंगाली समुदाय की मालती विश्वास पर भरोसा जताया है। बुधवार को मालती विश्वास ने थारू समुदाय के लोगों के बीच पहुंचकर जनसभाएं कीं। मालती और कांग्रेस के रणनीतिकारों की कोशिश बंगाली समुदाय के वोटों में सेंधमारी को रोकते हुए अन्य समुदायों के बीच पैठ बनाने की है। मालती इसके लिए बंगाली समुदाय से होने और स्थानीय होने का तर्क दे रही हैं।
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भाजपा की कोशिश यहां लगातार सेंधमारी की
- फोटो : SELF
कांग्रेस की मुसीबत यह है कि बरा में अब कांग्रेस से बगावत कर चुके कांग्रेस के 2012 के आम चुनाव में प्रत्याशी रहे सुरेश गंगवार बैठे हैं। यहां के अलीनगर, सहदोरा, गऊघाट, सेमलपुरा, बरी आदि इलाके मुस्लिम बहुल है। कांग्रेस मान रही है कि यहां राहत है, लिहाजा उसका मूवमेंट भी इस क्षेत्र में अभी कम है।
दलित और मुस्लिम वोटों के लिए पूर्व विधायक नारायण पाल कांग्रेस की ओर से चुनाव मैदान में हैं। बुधवार को नारायण पाल ने नका, गऊ घाट जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों और हल्दुआ जैसे सिख एवं दलित बहुल इलाकों में दौड़भाग की। प्रशांत किशोर की टीम भी इसी क्षेत्र में है।
बंगाली मतदाता बहुल वाला शक्तिफार्म इलाका भाजपा प्रत्याशी सौरभ बहुगुणा की सबसे बड़ी चाहत और फोकस का केंद्र है। सौरभ अपने पिता और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की ओर से इस क्षेत्र के लिए किए गए काम, पिछले एक साल से क्षेत्र में सक्रियता को आधार बनाए हुए हैं। विजय बहुगुणा के लिए ही बंगाली समुदाय से पहली बार विधायक बने किरण मंडल ने 2012 में अपनी सीट छोड़ी थी। मंडल अब कांग्रेस में हैं और विजय बहुगुणा भाजपा में।
भाजपा की कोशिश यहां लगातार सेंधमारी की है। इसके लिए सौरभ नगर पंचायत चेयरमैन सुकांत ब्रहम, ग्राम प्रधान संजय बछाड़ आदि को सारथी बनाए हुए हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच की खींचतान में अब बंगाली समुदाय में भी वोटों की एकजुटता और उसके बंटने को लेकर मंथन है।
बंगाली वोटों पर बहुत अधिक विश्वास नहीं कर पा रहे सौरभ की कोशिश विधानसभा के करीब 29 हजार मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की भी है। भाजपा से दूर-दूर रहने वाले इस वर्ग विशेष को लुभाने के लिए सौरभ पार्टी को किनारे रख व्यक्तिगत आधार पर वोट मांग रहे हैं। सौरभ की रात की जनसभाएं मुस्लिम बहुल इलाकों में हो रही हैं।
शक्तिफार्म के बंगाली बहुल अरविंद नगर, निर्मल नगर, बैकुंठपुर आदि में सौरभ दिन में घूम रहे हैं। बुधवार को बाबुल सुप्रियो की जनसभा भी बैकुंठपुर में थी। बसपा के नवतेज पाल सिंह बसपा के कैडर वोट और अपने सिख होने पर भरोसा किए हुए हैं।
कुल मतदाता-107295
पुरुष-57125
महिला-49939
मतदान केंद्र-125, नगरीय-28, ग्रामीण-97
2012 विधानसभा चुनाव
किरण मंडल-भाजपा, 29280
नारायण पाल-बसपा, 16668
सुरेश गंगवार-कांग्रेस, 15560
भौगोलिक विस्तार
-सितारगंज विधानसभा के एक ओर किच्छा और दूसरी तरफ नानकमत्ता विधानसभा है। सितारंगज 2012 में पहली बार सामान्य सीट बनी। इस विधानसभा की सीमा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और बरेली जिले से भी मिलती है।
2017 के विधानसभा चुनाव प्रत्याशी
मालती विश्वास-कांग्रेस
सौरभ बहुगुणा-भाजपा
नवतेज पाल सिंह-बसपा
योगेंद्र कुमार यादव-सपा
हेमचंद्र -यूकेडी
अख्त्यार अहमद पटौदी-निर्दलीय
मोबीन अली-निर्दलीय
अब्दुल वहीद-निर्दलीय
बिंदा विश्वास-निर्दली
जातीय समीकरण
बंगाली-33,000
मुस्लिम-29,000
दलित-13,000
सिख-11,000
थारू-5,000
पर्वतीय-6,000