रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर युवा किसी के बहकावे में न आएं। यह योजना युवा और देशहित में है। भविष्य में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। बृहस्पतिवार को वह गढ़ी कैंट में रक्षा संपदा कार्यालय के उद्घाटन के दौरान संबोधित कर रहे थे।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि अग्निपथ योजना के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रप्रेम और अपना भविष्य संवारने का मौका मिला है। पहले हफ्ते से जब इसकी प्रक्रिया शुरू होगी तो युवाओं के साथ ही विरोध करने वालों को योजना के बारे में ठीक से पता चल जाएगा। देहरादून में रक्षा संपदा कार्यालय खुलने को उन्होंने ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहले ही होना चाहिए था। अभी तक यहां के लोगों को भवन, भूमि संबंधी मसलों के लिए मेरठ और बरेली के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब दून में रक्षा संपदा कार्यालय और रानीखेत में उप कार्यालय खुलने से लोगों की परेशानी दूर होगी। कहा कि रक्षा भूमि के रूप में हमारे पास देशभर में बड़ा भूमि बैंक है।
वर्तमान में देशभर में 17.99 लाख एकड़ रक्षा भूमि है। इसमें से 1.61 लाख एकड़ छावनियों के अधीन और 16.38 लाख एकड़ छावनियों के बाहर है। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर, जीओसी सब एरिया मेजर जनरल संजीव खत्री, जीओसी 14 रैपिड मेजर जनरल जीएस चौधरी, डिप्टी जीओसी सब एरिया ब्रिगेडियर अनिर्बन दत्ता, 14 रैपिड के डिप्टी जीओसी तपन लाल शाह, प्रधान निदेशक रक्षा संपदा मध्य कमान जीएस राजेश्वरन, डीईओ व सीईओ कैंट क्लेमेंटटाउन कौशल गौतम, सीईओ कैंट अभिनव सिंह आदि मौजूद थे।
सबसे पहले कॉलेज की लीज का हो नवीनीकरण
राज्य के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गोरखा मिलिट्री कॉलेज के लीज का मामला रक्षा राज्य मंत्री के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि इसे डिग्री कॉलेज बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन लीज का नवीनीकरण न होने से मामला अटक गया। अब दून में रक्षा संपदा कार्यालय खुल गया है। वह चाहते हैं कि कार्यालय में सबसे पहला काम लीज के नवीनीकरण से किया जाए। यह सैकड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।
बढ़ाई जा रही है सेना की ऑपरेशनल क्षमता
रक्षा संपदा के महानिदेशक अजय कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेना की ऑपरेशनल क्षमता में बढ़ोतरी के लिए यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए भूमि की आवश्यकता है। दून में रक्षा संपदा कार्यालय व रानीखेत में उप कार्यालय खुलने से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। पहले भूमि हस्तांतरण में दो से तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक महीने के अंदर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।