देश में अब कहीं भी बासमती की प्रजाति इंद्रासन व्यवसायिक तौर पर उगानी है तो इसके लिए पंतनगर के पास स्थित इंद्रपुर गांव के किसान इंद्रासन सिंह की अनुमति लेनी होगी।
जीबी पंत विवि, पंतनगर की सहयोग से इंद्रासन सिंह की यह चावल प्रजाति प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फॉर्मर्स राइट अथॉरिटी (पीपीएफआरए) में रजिस्टर्ड हो गई है। देशभर से अब तक कुल एक हजार प्रजातियां पंजीकृत हुई हैं, जिसमें तीन और उत्तराखंड की हैं।
पंतनगर विवि के डिपार्टमेंट ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग के हेड प्रो. एचएस चावला ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसके किसानों की प्रजातियां उनके नाम से पीपीएफआरए में रजिस्टर हुई हैं।
इंद्रासन के अलावा एक सोसाइटी के नाम पर हंसराज चावल और दूसरी सोसाइटी के नाम पर तिलकचंदन चावल की प्रजाति पंजीकृत हुई है।