बदरीनाथ धाम में बुधवार को श्री आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पंच पूजा के दूसरे दिन बदरीनाथ धाम में श्री आदि केदारेश्वर मंदिर में रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने भगवान आदि केदारेश्वर को अन्नकूट (पके चावल) अर्पित किया। रावल की ओर से पूजा-अर्चना के साथ भगवान आदिकेदारेश्वर और नंदी पर चारों ओर से गरम चावल का लेपन किया गया। इस दौरान आदि केदारेश्वर भगवान की विशेष पूजाएं र्हुइं और मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
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बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि आदि केदारेश्वर मंदिर के साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट भी विधि-विधान से बंद कर दिए गए हैं। परंपरा के अनुसार भगवान आदिकेदारेश्वर को अन्नकूट अर्पित किया गया। बृहस्पतिवार को खडग पुस्तक बंद होने के बाद बदरीनाथ मंडप में वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जाएगा। इस मौके पर अपर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, अपर धर्माधिकारी सत्यप्रसाद चमोला, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, सहायक मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, दफेदार कृपाल सनवाल, दर्शन कोटवाल, योगेश्वर पुरोहित, पुजारी किशोरी प्रसाद भट्ट और रामकृष्ण डंगवाल आदि मौजूद रहे।
बाबा मद्महेश्वर के आवागमन पर 22 से होगा मेला
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के चल उत्सव विग्रह डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ आगमन पर मानसून में तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेला 22 नवंबर से शुरू होगा।
22 नवंबर को मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसी दिन बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए गौंडार पहुंचेगी। इधर, डोली आगमन पर मद्महेश्वर घाटी के 13 ग्राम पंचायतों द्वारा मानसून में 22 से 24 नवंबर तक तीन दिवसीय मेला का आयोजन किया जा रहा है।
मेला समिति के अध्यक्ष व ग्राम प्रधान देवेंद्र पंवार ने बताया कि इस बार उत्तराखंड संस्कृति विभाग की टीम के साथ ही स्कूली छात्र-छात्राओं और महिला व युवक मंगल दलों के कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होंगे। इस मौके पर सुरेशी रावत, संजय मनवाल, नर्वदा देवी, कमलेश पंवार आदि मौजूद थे।