उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही भाजपा दिग्गज नेताओं के दमखम के साथ-साथ पार्टी के सांगठनिक नेटवर्क पर ज्यादा भरोसा कर रही है। पार्टी ने इस बार प्रदेश में 51 प्रतिशत वोट और 60 सीटें हासिल करने का लक्ष्य बनाया है। इस लक्ष्य को साधने के लिए भाजपा चुनावी चालों का इंद्रजाल तैयार कर रही है।
पार्टी के खाते में बेशक केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों के डबल इंजन से हासिल उपलब्धियों की एक लंबी फेहरिस्त है, लेकिन वह सत्ता रोधी रुझान के भय से भी डरी है। राज्य के मतदाताओं को अपने वश में करने के लिए पार्टी योजनाबद्ध तरीके से कदम बढ़ा रही है। सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने चरणबद्ध रणनीति तैयार की है।
1. वोटों का गणित : भाजपा ने 51 प्रतिशत वोट का लक्ष्य बनाया है। 2017 के चुनाव में पार्टी को 46.51 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। पार्टी का अनुमान है कि 51 प्रतिशत वोट लेकर वह 60 सीटें प्राप्त कर सकती है।
2. हर बूथ मजबूत : पार्टी हर बूथ मजबूत करने के अभियान पर है। 11235 बूथों पर पार्टी ने 21 सदस्यों की समिति(टीम) तैयार कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इन 2,35,935 कार्यकर्ताओं से संवाद और सत्यापन का काम निपटा लिया है।
3. शक्ति केंद्रों की निगरानी में बूथ : पार्टी ने प्रदेश में 2391 शक्ति केंद्र बनाए हैं। एक शक्ति केंद्र पर एक पालक और एक बीएलए बनाया गया है। हर शक्ति केंद्र को चार से पांच बूथों की जिम्मेदारी दी गई है।
4.मंडलों में 16 हजार से अधिक फौज : शक्ति केंद्रों के ऊपर 252 मंडल हैं। प्रत्येक मंडल में 60 से 65 सदस्यों की कार्यकारिणी है। इस हिसाब से मंडलों में 16,380 कार्यकर्ताओं की ऐसी फौज है, जो संगठन के कामकाज में पूरी तरह से दक्ष हैं। इससे ऊपर 14 जिला कार्यकारिणी हैं।
5. व्यूह रचना : विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने व्यूह रचना तैयार की है। इसमें विधानसभा प्रभारी और पूर्णकालिक विस्तारकों की अहम भूमिका है। पार्टी ने दोनों ही को मैदान में उतार दिया है। विस्तारक संघ से भाजपा में आए लोगों को बनाया गया। उन्हें जिस विधानसभा का जिम्मा सौंपा गया है, अब वे वहां से चुनाव के बाद ही लौटेंगे। चुनाव की रणनीति तैयार करना, जनता का मिजाज भांपने, कार्यकर्ताओं की समस्याओं को जानना और उनका समाधान सुझाना और सबसे अहम संभावित प्रत्याशियों का जमीनी आधार टटोलने का काम विस्तारक ही कर रहे हैं।
6. पन्ना प्रमुख पन्ना प्रमुख टोली : चुनावी रणनीति के लिहाज से पार्टी इसे अपनी सबसे अहम कड़ी मान रही है। बूथों के सत्यापन के बाद अब पार्टी पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करने के अभियान पर है। एक बूथ पर चार से पांच पन्ना प्रमुख बनाए जा रहे हैं।
7. हर पंचायत में स्वास्थ्य स्वयंसेवक : पार्टी ने हर पंचायत में दो स्वास्थ्य स्वयंसेवक बनाए हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से निपटने के लिए पार्टी स्वयंसेवकों के माध्यम से जनता को यह एहसास दिलाना चाह रही है कि केंद्र और राज्य सरकार ने कितना काम किया।
8. मोदी, शाह, नड्डा, संतोष करेंगे संवाद : सांगठनिक नेटवर्क का जाल बिछाने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ऑनलाइन और ऑफलाइन संवाद करेंगे।
9. सम्मेलनों के जरिए सियासत गरमाने की तैयारी : संगठन के हर स्तर को सक्रिय बनाने के लिए पार्टी ने हर विधानसभा में शक्ति केंद्र सम्मेलन, पन्ना प्रमुखों के सम्मेलन और बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन करने की रणनीति बनाई है। इसी तरह पार्टी के सात प्रमुख मोर्चों के सम्मेलन अलग से होंगे।
10. सोशल मीडिया पर अलग लड़ाई : पार्टी ने फील्ड में कार्यकर्ताओं की फौज को उतारा है तो चुनावी विश्लेषकों, राजनीतिक जानकारों, आईटी प्रोफेशनल की एक टीम भी भाजपा मुख्यालय में तैनात की जा रही है, जो सोशल मीडिया पर पार्टी के पक्ष में प्रचार के साथ ही हर सीट का विश्लेषण कर पार्टी की कमजोर और मजबूत पक्ष के बारे में बताएगी। जल्द ही पार्टी का एक वॉर रूम भी तैयार होने जा रहा है।
भाजपा एक कैडर बेस पार्टी है। हम साल के 365 दिन सांगठनिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव की हमने चरणबद्ध तैयारी की है। दिसंबर महीने तक के कार्यक्रम तय हैं। उसी दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।
- मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा