जहां तक जेटली की उत्तराखंड में राजनीतिक सक्रियता का सवाल है, तो उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर प्रदेश का दौरा किया। वे 2014 लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड आए। इस दौरान उन्होंने बुद्धिजीवी सम्मेलनों को संबोधित किया। पत्रकार वार्ताएं भी कीं। जेटली से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए भाजपा नेता अजेंद्र अजय कहते हैं,‘ जेटली जी को मुद्दों की गहरी समझ थी। जब मैं पार्टी के मीडिया कार्य से जुड़ा था, उस समय जेटली राष्ट्रीय प्रवक्ता होते थे।
कई कार्यशालाओं में उनका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। एक बार जब वे मसूरी आए तब एयरपोर्ट पर तत्कालीन वित्त मंत्री प्रकाश पंत के साथ मुझे भी उनसे मिलने का अवसर मिला। करीब एक घंटे की चर्चा के दौरान उन्होंने उत्तराखंड के बारे में कई ऐसी जानकारियां बताई जिन्हें जानकर मैं हैरान रह गया।
जेटली को गढ़वाल और कुमाऊं के प्रमुख स्थलों, उनकी विशेषताओं और उनके बारे में विकास की संभावनाओं को लेकर गजब की सोच और विजन था।’
गंभीर बीमारी की चपेट में आने से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली आखिरी बार देहरादून दून स्कूल के पुराने छात्रों के मिलन समारोह में आए थे। इस कार्यक्रम में वे मुख्य वक्ता के तौर पर आमंत्रित थे। भाजपा के सह मीडिया प्रभारी बलजीत सिंह सोनी बताते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ उन्होंने एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया था और उन्हें कार्यक्रम स्थल तक लाए थे। कार्यक्रम में उनका भाषण काफी सराहाया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने देहरादून में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विजन डाक्यूमेंट का विमोचन किया था।
पार्टी के संकटमोचक थे जेटली : गैरोला
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला ने कहा कि अरुण जेटली जब तक सक्रिय राजनीति में रहे, पार्टी के संकटमोचक की भूमिका में रहे। उनमें सही शब्दों के चयन की बेजोड़ क्षमता थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब वे आए तो उन्होंने आर्थिक, व्यापारिक और आयकर से जुड़े मसलों पर हर शंकाओं और सवालों का जवाब दिया। उनके बौद्धिक कौशल की आज भी चर्चा होती है।