लोगों को बैडमिंटन खेलता देख उसने भी रैकेट की जिद की, लेकिन रैकेट खरीदने की हमारी हैसियत नहीं थी। मां जमुना सरकार ने भावुक होते हुए बताया कि खेतों में काम करके जुटाये पैसों से बेटे के लिए बैडमिंटन का रैकेट खरीदा था।
इंटरमीडिएट तक उसने एक सामान्य खिलाड़ी के तौर पर तीन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उसे अच्छा खेलता देख बैडमिंटन खिलाड़ी डीके सेन ने पैरा बैडमिंटन टीम में खेलने की सलाह दी।
अपने प्रदर्शन के बल पर उसने जल्द ही नेशनल फिर इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन टीम में जगह बनाई। वर्ष 2017 में पिता मनिंदर सरकार के निधन के बाद मनोज काफी टूट गए, लेकिन उन्होंने हौंसला नहीं हारा और वर्तमान में पैरा एशियन गेम्स की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
छोटे भाई मनमोहन ने बताया कि दो भाई और दो बहनों में मनोज दूसरे नंबर के हैं। दोनों बड़ी बहनों ललिता और सबिता की शादी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मनोज को अर्जुन अवॉर्ड मिलना रुद्रपुर और कुमाऊं समेत पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।