फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इनके जज्बे को सलामः 65 साल की उम्र में जीते सात स्वर्ण पदक, आगे की ये है योजना

Tue, 25 Sep 2018 11:54 AM IST
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
रमा शंकर मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
उम्र उनके लिए सिर्फ एक संख्या भर है। लगन और मेहनत ऐसी कि युवाओं को पीछे छोड़ दे। इसी जज्बे और जुनून की बदौलत उन्होंने एक -दो नहीं बल्कि सात स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। ये करिश्मा किया है मां वैष्णो देवी लॉ कॉलेज से पढ़ाई करने वाले 65 वर्षीय ‘युवा’ रमा शंकर मिश्रा ने।
विज्ञापन


नौ अक्तूबर को होने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्हें इन पदकों से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2014 में भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद रमा शंकर मिश्रा ने नियमित विद्यार्थी के रूप में दाखिला लिया तथा एलएलबी में टॉप कर कीर्तिमान बना दिया।

हालांकि इसके बाद भी उनका सफर रुका नहीं है। अब वे बीबीडी कॉलेज से एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं। लखनऊ के गोमतीनगर निवासी रमा शंकर मिश्रा बताते हैं कि नौकरी के दौरान काफी मुकदमे आते थे।
विज्ञापन


इनकी सुनवाई को उन्हें कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे। नौकरी की वजह से काफी सीमाएं होती हैं। ऐसे में सेवानिवृत्त होने के बाद लॉ की पढ़ाई करने का सोचा। वर्ष 2014 में रिटायरमेंट के बाद 2015 में उन्होंने मां वैष्णो देवी लॉ कॉलेज में दाखिला ले लिया।

ऐसे मिली प्रेरणा

- फोटो : डेमो
लखनऊ के गोमतीनगर निवासी रमा शंकर मिश्रा बताते हैं कि नौकरी के दौरान काफी मुकदमे आते थे। इनकी सुनवाई को उन्हें कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे। नौकरी की वजह से काफी सीमाएं होती हैं।

ऐसे में सेवानिवृत्त होने के बाद लॉ की पढ़ाई करने का सोचा। वर्ष 2014 में रिटायरमेंट के बाद 2015 में उन्होंने मां वैष्णो देवी लॉ कॉलेज में दाखिला ले लिया।
रमा शंकर के अनुसार विद्यार्थियों का यह कहना कि कॉलेजों में पढ़ाई नहीं होती, गलत है।

मां वैष्णो देवी लॉ कॉलेज में उन्होंने तीन साल नियमित कक्षा की। इस दौरान कभी ऐसा नहीं हुआ कि पढ़ाई न हुई हो। उनके अनुसार विद्यार्थी कक्षा और किताब से पढ़ाई करने के बजाए गेस पेपर का सहारा लेते हैं, इसलिए नंबर अच्छे नहीं आते।

बताया कि कॉलेज से आने के बाद मैं रोजाना नोट्स तैयार करता और उनसे पढ़ाई करता। शायद इसी कारण उन्होंने टॉप किया। पत्नी विमला मिश्रा रोज उनसे सवाल करती कि पढ़ेंगे या फिर सोएंगे तो जवाब हमेशा पढ़ाई करने का ही होता। पढ़ाई में नियमित रहने में पत्नी की भूमिका अहम रही।
विज्ञापन

दीक्षांत समारोह में मिलेंगे पदक

- फोटो : डेमो
मिश्रा बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई करने की बात घर में कही तो पत्नी के साथ तीनों बच्चे भी आश्चर्यचकित रह गये। हालांकि सबने फैसले पर खुशी जताई। रमा शंकर मिश्रा की बेटियों डॉ. श्वेता मिश्रा और इंजीनियर दिव्या मिश्रा की शादी हो चुकी है।

बेटा अंकित मिश्रा इंजीनियरिंग के बाद दिल्ली में नौकरी कर रहा है। रमा शंकर मिश्रा ने कहा मिल रही पेंशन मेरे लिए पर्याप्त है। मेरा मकसद गरीब व वंचितों को कानूनी सहायता देना है। बार काउंसिल में पंजीकरण भी करा लिया है। अब प्रैक्टिस शुरू करेंगे। 

दीक्षांत समारोह में मिलेंगे ये पदक 
बाबू महावीर श्रीवास्तव गोल्ड मेडल।
श्री द्वारिका प्रसाद निगम गोल्ड मेडल।
प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल।
पंडित देवी सहाय मिश्रा गोल्ड मेडल।
डॉ. राज कृष्णा मेमोरियल गोल्ड मेडल।
डीपी बोरा मेमोरियल गोल्ड मेडल।
बीके धवन मेमोरियल गोल्ड मेडल।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें