जीएसटी में राज्य को कर प्राप्त होने के सिद्धांत में बदलाव हो गया। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में विशेष औद्योगिक पैकेज से प्रभावित होकर कई उद्योग उत्तराखंड में आए। उन्हें केंद्रीय उत्पाद कर व अन्य में छूट थी। उनके उत्पादों पर लगने वाले कर से प्राप्त राजस्व उत्तराखंड राज्य को प्राप्त हो रहा था।
लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यहां का उत्पादन जिस राज्य में खरीदा जाएगा, वहां के राज्य को कर की प्राप्ति होगी। यानी लाभ उपभोक्ता वाले राज्य को होगा। यानी राज्य में उपभोग का आधार कम होेने, वस्तुओं पर वैट की तुलना में कर की प्रभावी दर कम होने, राज्य में सेवा का अपर्याप्त आधार तथा जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर कर दी दर में लगातार कमी से उत्तराखंड सरीखे राज्यों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
वित्तीय प्रबंधन संभालने की चुनौती
जीएसटी मुआवजा बंद होने से पांच हजार करोड़ के राजस्व की हानि होने से राज्य के वित्तीय प्रबंधन को संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। इसे संभालने के लिए सरकार के पास राजस्व बढ़ाए जाने के उपाय करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।
शुरू हो गए हैं ये उपाय
अपर सचिव वित्त अहमद इकबाल के मताबिक, राज्य सरकार कर योग्य सीमा से ऊपर का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों का चिन्हीकरण कर रही है। इसके लिए व्यापारियों का ऑडिट किया जा रहा है। प्रवर्तन इकाइयां दैनिक समीक्षा कर रही हैं। वैट की बकाया वसूली की नियमित वसूली पर जोर है। राजस्व बढ़ोतरी के लिए परामर्शी सेवाओं का लाभ लिया जा रहा है।
राजस्व इस हाथ आएगा उस हाथ जाएगा
15वें वित्त आयोग ने उत्तराखंड राज्य को पांच साल के लिए राजस्व घाटा अनुदान देकर बहुत बड़ी राहत दी। इस मद में राज्य को पांच साल में 28147 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त होगा। जीएसटी मुआवजा बंद होने के बाद दूसरे हाथ से 25 हजार करोड़ का राजस्व फिसल भी जाएगा। यानी कुल मिलाकर राज्य को 3,147 करोड़ का फायदा होगा। हालांकि अन्य सभी मदों को मिलाकर राज्य के लिए पांच साल में कुल 89845 करोड़ रुपये का अनुदान तय है।