इंद्रानगर गल्जवाड़ी में रहने वालीं रुचि काला, पूूनम थापा और विनिता अधिकारी के पति भी अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार फंसे लोगों का तत्काल वापस लेने का इंतजाम करे। हालांकि वीडियो कॉल के माध्यम से वह लगातार फंसे अपनों के संपर्क में हैं, लेकिन कुछ देर अगर फोन नहीं मिल रहा तो वे परेशान हो जाती हैं।
कुछ खुशकिस्मत रहे जो लौट गए
दून के कुछ लोग ऐसे थे जो ब्रिटिश एंबेसी में काम करते थे। गल्जवाड़ी निवासी दीपक अधिकारी की पत्नी विनिता अधिकारी ने बताया कि उनके पति करीब डेढ़ सौ लोगों के साथ 15 अगस्त को वहां से निकल गए थे। वहां से उन्हें दुबई और फिर लंदन ले जाया गया। हालांकि वह अभी तक घर नहीं लौटे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि वह सुरक्षित वहां से निकल गए हैं, लेकिन अभी उनका भाई वहीं फंसा हुआ है। उन्हें वहां से आने नहीं दिया जा रहा है।
अफगानिस्तान के मसले पर सामने आई केंद्र की विफलता : हरीश
अफगानिस्तान में फंसे भारतीय लोगों को लेकर पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की विफलता बताया है। हरीश रावत ने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति बहुत चिंताजनक है। हमारे वह लोग, जो भारत माता की सेवा और अपने मित्र देश की मदद करने के लिए अफगानिस्तान गए, आज उनका जीवन, उनका परिवार संकट में है।
तालिबान कंधार पहुंच गए और हम यह अंदाजा ही लगाते रह गए कि उनको आने में 30 दिन लगेंगे या 40 दिन लगेंगे। तालिबान ने काबुल को घेर लिया। केंद्र सरकार की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि अफगानिस्तान में फंसे हुए हमारे नागरिकों और हमारे भाईयों को वापस सुरक्षित भारत लाए।
अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंडियों को लेकर लगातार केंद्र सरकार के संपर्क हैं। अफगानिस्तान से वापसी की कार्रवाई भारत सरकार को ही करनी है। सरकार लगातार इस मामले में नजर बनाए हुए है। उनका प्रयास होगा कि अफगानिस्तान में फंसे सभी उत्तराखंडी सही सलामत वापस लौटे।
- आनंद बर्धन, अपर मुख्य सचिव गृह