आधार कार्ड भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन डाक विभाग की नजर में शायद इसका कोई महत्व नहीं। क्योंकि हजारों की संख्या में लोग फार्म भरकर आधार कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।
उन्हें पता ही नहीं है कि उनके कार्ड डाकखानों के अंदर बोरों में बंद हैं। आधार कार्ड बनाने वाली कंपनियों ने इसकी जिला प्रशासन से शिकायत की है।
देहरादून में 10 लाख कार्ड
राजधानी में बने आधार कार्ड की संख्या अगर कोई वेबसाइट पर देखेगा तो चौंक जाएगा। अकेले देहरादून जिले में 10 लाख 22 हजार 785 आधार कार्ड बने हैं, लेकिन इनमें से एक चौथाई कहां गए? किसी को पता नहीं हैं?
लोगों की शिकायत से आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियां परेशान हैं। इससे उनका भुगतान संकट में पड़ रहा है। एजेंसियों का कहना है कि जिनका आधार कार्ड नहीं आता, वे वेबसाइट पर चेक करने के बजाए दोबारा फार्म भर रहे हैं। जो फार्म रिजेक्ट हो जाते हैं उनका पैसा एजेंसी को नहीं मिलता है।
एंजेंसियों ने की शिकायत
प्रदेश में आधार कार्ड बना रहीं विरंची और कारवी डाटा मैनेजमेंट सर्विसेस लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की है। इसके साथ ही अनुरोध किया है कि डाकखानों में आधार कार्ड को चेक करवाएं।
आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियों ने यह भी शिकायत की है कि डाकखानों से आधार कार्ड कुछ दिन के बाद वापस भेज दिया जाता है। कार्ड वापस आने की सूचना मुख्यालय एजेंसियों को भेजता है।
एडीएम ने जीपीओ को पत्र लिखा
डाकखानों से आधार कार्ड लोगों को न भेजे जाने के संबंध में एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह ने शुक्रवार को जीपीओ के सीनियर पोस्ट मास्टर को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि एजेंसियों की शिकायत है कि डाकखानों में आधार कार्ड डंप पड़े हैं। इससे एजेंसियां परेशान हैं और आम जनमानस को परेशान होना पड़ रहा है। विभाग से डंप पड़े आधार कार्ड को तत्काल वितरित करवाने के लिए कहा गया है।