अभी तक दृष्टिबाधितों को आपने केवल शिक्षक, टाइपिस्ट या रिसेप्शनिस्ट के रूप में देखा होगा। लेकिन जल्द ही वह पशुपालकों, डेयरी मालिकों के रूप में भी नजर आएंगे।
दृष्टिबाधितों को आत्म निर्भर बनाने के लिए दून का राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआईवीएच) देश में पहली बार एक अनोखा प्रयोग करने जा रहा है। इसके तहत दृष्टिबाधितों को न केवल पशुपालन से जोड़ा जाएगा बल्कि पशु मुहैया भी कराए जाएंगे।
उत्तराखंड और हिमाचल का हुआ चयन
पहले चरण में इस कार्यक्रम को चलाने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का चयन किया गया है। समुदाय आधारित इस कार्यक्रम का आगाज फिलहाल आने वाले दिसंबर महीने के मध्य में प्रस्तावित है।
दृष्टिबाधितों को पशुपालन से जोड़ने से पहले उन्हें इसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी मुहैया कराया जाएगा, ताकि वह कार्य की बारीकी समझ सकें। यह प्रशिक्षण लगभग तीन माह का होगा।
ये हैं दृष्टिबाधित
दृष्टिबाधित वह जो किसी भी चश्मे या अन्य उपचार से देख पाने में सक्षम नहीं। कई बार जन्मांध। अन्य विजन करेक्शन के साथ कुछ हद तक देखने में कामयाब। इसकी डिग्री अलग-अलग है।
पशुपालन को इसलिए चुना
पहाड़ी इलाकों में रहने वाले ज्यादातर दृष्टिबाधितों के परिवारों की आजीविका का जरिया खेती है। ऐसे में पशुपालन से जुड़ना उनके लिए आसान रहेगा। इसी सोच केतहत यह कार्यक्रम हो रहा है।
स्किल डेवलपमेंट है मकसद
देश में बड़ी संख्या में दृष्टिबाधित ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। संस्थान की गतिविधियों तक उनकी पहुंच नहीं। ऐसे में उनके स्किल डेवलपमेंट के लिए संस्थान की तैयारी उन तक पहुंचने की है।
फिलहाल पायलट बेसिस पर होगा कार्यक्रम
यह कार्यक्रम फिलहाल पायलट बेसिस पर चलाया जाएगा। इसके लिए इच्छुक दृष्टिबाधितों का चयन अभी तक ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के पारंपरिक आधार पर करने की तैयारी है।
उत्पादों की मार्केटिंग भी संस्थान के जरिए
संस्थान ने अपने साथ पशुपालकों, डेयरी फार्मर्स के समूहों को भी जोड़ा है, ताकि दृष्टिबाधितों को प्रशिक्षण का कार्य आसान बन सके। दुग्ध और अन्य उत्पादों की मार्केटिंग भी संस्थान के माध्यम से होगी।
इनका है कहना-
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए केंद्र से पैसा मुहैया कराया जाएगा। इस संबंध में हाल ही में नई दिल्ली में बैठक भी हुई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अगर यह प्रोजेक्ट कामयाब रहता है तो इसे देश में अन्य जगह भी लागू किया जाएगा।
-अनुराधा मोहित डालमिया, डायरेक्टर, एनआईवीएच।