उत्तराखंड में दो दिन से भारी बारिश से हुए भूस्खलन से पौड़ी जिले में भारी नुकसान हुआ है। इस भूस्खलन से 15 की मौत (शव मिले) जबकि आठ लोग नदी नालों में बह गए हैं और दो लोग अब भी मलबे में दबे हुए।
ऐसा माना जा रहा है कि नालों में बहे लोग और मलबे में दबे लोगों के बचने की संभावना बहुत कम है। इस तरह इस दुर्घटना केवल पौड़ी जिले में 25 लोगों को मरने की आशंका है।
इसके अलावा पौड़ी, देहरादून और हरिद्वार में बादल फटने, बाढ़ व भूस्खलन से पिछले दो दिनों में भारी तबाही मची है।
दो दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश
पौड़ी जिले में 15 अगस्त की सुबह कई जगह बादल फटने की घटनाएं हुईं। यमकेश्वर, कल्जीखाल, द्वारीखाल में बादल फटने और भूस्खलन से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
पिछले दो दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश का दौर चल रहा है। 15 अगस्त को पौड़ी जिले के एक गांव में भूस्खलन से पूरा का पूरा गांव जमींदोज हो गया।
अभी भी मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका है। सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। बारिश के चलते बचाव कार्य में मुश्किल आ रही है।
कइयों के मलबे में फंसे होने की आशंका
15 अगस्त को कोटद्वार से करीब 60 किमी दूर द्वारिखाल के परस्यूली गांव में बादल फटने से पूरा गांव मलबे में दब गया। मलबे में गांव के दबने की खबर से प्रशासन में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही आनन-फानन में बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। मलबे में कई और ग्रामीणों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। मलबे में कई मकान दब हुए हैं। राहत बचाव कार्य जोर-शोर से चल रहा है।
कोटद्वार में गुरुवार को जमकर बारिश हुई, जिससे जहां की नदियां उफान पर हैं, वहीं मौसम सुहावना होने से लोगों को राहत मिली है। रामगंगा बांध के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। बांध का जलस्तर 355.570 मीटर के पार हो गया है।