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126 खिलाड़ियों के साथ हुआ खिलवाड़

Thu, 23 Jan 2014 01:48 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के 126 खिलाड़ी राष्ट्रीय विद्यालयी एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने गए, लेकिन प्रदेश को केवल एक मेडल मिला।
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पिथौरागढ़ हॉस्टल के एथलीट ने जीता पदक
प्रतियोगिता में राज्य को महज एक कांस्य पदक मिला, जिसे पिथौरागढ़ हॉस्टल के एथलीट ने जीता। जानकार बताते हैं कि उत्तराखंड के खिलाड़ी दूसरे प्रदेश के खिलाड़ियों से इसलिए मात खा गए, क्योंकि उन्हें तैयारियों के लिए न तो सही कोच मिले न ही दूसरे जरूरी संसाधन।

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प्रतियोगिता में जाने से पहले खिलाड़ियों के लिए कोई कैंप भी नहीं लगाया गया। एक-दो दिन पहले खिलाड़ियों को दून बुलाया गया और यहीं से ट्रेन से जैसे-तैसे प्रतियोगिता के लिए भेज दिया गया।
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राष्ट्रीय विद्यालयी एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए उत्तराखंड की मुकम्मल बताई जा रही तैयारियों की हकीकत प्रतियोगिता में मिले पदक से सामने आ गई। राज्य में एथलेटिक मीट कराने के बावजूद न तो कैंप लग सका न खिलाड़ियों को सुविधाएं मिली।

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इसका खुलासा अमर उजाला ने किया था, फिर भी स्कूल शिक्षा में खेल विभाग के जिम्मेदार अफसर इन बातों को नकारते रहे। रांची में 8-12 जनवरी तक होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के करीब 138 खिलाड़ियों को जाना था, लेकिन गए 126 ही।

किसी को नहीं खबर
5 जनवरी को राज्य की टीम गई, लेकिन टूर्नामेंट से कब लौट आई, किसी को खबर नहीं। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अधिकतर खिलाड़ी पस्त दिखे। गोला फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद, पोलवाल्ट, एथलेटिक्स समेत सभी खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ी मुकाबले में ही नहीं दिखे।
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बमुश्किल पिथौरागढ़ हॉस्टल के एथलीट मनोज सैनी ने 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बारे में विभाग के अधिकारियों ने कोई जानकारी नहीं दी है। कई बार संपर्क किए जाने के बाद भी शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल से बातचीत नहीं हो सकी।

क्यों हुआ शर्मनाक प्रदर्शन
- सरकारी स्कूलों में खेलों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं दी जाती
- विद्यालयी खेलों को जैसे-तैसे केवल आयोजित कर दिया जाता है
- खिलाड़ियों के चयन में भी पक्षपात के आरोप लगते ही रहते हैं
- खिलाड़ियों को अभ्यास कराने के लिए काबिल कोच नहीं होते
- प्रतियोगिता में जाने से पहले खिलाड़ियों का प्रैक्टिस कैंप नहीं लगा
- दून में खिलाड़ियों को दो दिन पहले बुलाकर अपने हाल पर छोड़ा
- खिलाड़ियों के खाने-पीने सोने-रहने तक का ख्याल नहीं रखा गया
- प्रतियोगिता में जाने को खिलाड़ियों का ट्रेन में आरक्षण तक नहीं था
- प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के खाने-रहने की व्यवस्था नहीं थी
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