सड़क निर्माण के नाम पर लाखों का घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। केंद्र सरकार की ओर से गांवों के विकास के लिए संचालित की जा रही मनरेगा योजना के तहत सड़क निर्माण में एक और घोटाला सामने आया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक छह छोटी सड़कों के निर्माण के लिए जारी किए गए 18 लाख रुपये का भुगतान तो ले लिया गया, जबकि धरातल पर निर्माण नहीं किया गया है। प्रकरण उजागर होने के बाद इसकी जांच कराई गई तो जांच में ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान की मिलीभगत उजागर हुई। ग्राम विकास विभाग के सहायक परियोजना निदेशक ने जांच कर रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंप दी है। जिला विकास अधिकारी का कहना है कि प्रकरण में रिकवरी कराने के साथ ही संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
ग्राम्य विकास विभाग के सूत्रों के मुताबिक सहसपुर विकासखंड के गांव ठाकुरपुर में मनरेगा योजना के तहत सीसी रोड का निर्माण किया जाना था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक छह सड़कों के निर्माण के लिए विभाग की ओर से 18 लाख रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया। इस बजट से सड़कों का निर्माण किया जाना था लेकिन ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान ने मिलीभगत कर सड़क का निर्माण नहीं कराया। जबकि योजना के तहत जारी किए बजट का भुगतान कर लिया गया।
प्रकरण उजागर होने के बाद ग्राम्य विकास विभाग के सहायक परियोजना निदेशक विक्रम सिंह को मामले की जांच सौंपी गई। जांच अधिकारी व सहायक परियोजना निदेशक विक्त्रस्म सिंह ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि धरातल पर कुछ भी निर्माण नहीं किया गया है जबकि बजट की बंदरबांट कर ली गई है। जांच अधिकारी ने बताया कि घोटाले की जांच रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपी गई है। अब इसमें जिला विकास अधिकारी स्तर पर कार्रवाई किया जाना है। जांच अधिकारी व सहायक परियोजना निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी व संबंधित ग्राम प्रधान के स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
दूसरी ओर इस संबंध में जब जिला विकास अधिकारी प्रदीप कुमार पांडे से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि प्रकरण में रिकवरी कराने के साथ ही संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी गई है। उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं है जब मनरेगा योजना के तहत सड़क निर्माण में घोटाले की बात सामने आई है। इससे पहले भी जिले के कई विकास खंडों में इस तरह के मामले आ चुके हैं और कई ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है।