आपदा प्रबंधन विभाग ने कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने की अपील के साथ एक किताब प्रकाशित की है। इसमें कार्टून, ग्राफिक्स के जरिए संक्रमण की रोकथाम के उपाय और क्या करना है और क्या नहीं करना है की जानकारी दी गई है।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही लोग संक्रमण की भ्रांतियों का शिकार हो रहे हैं। कुछ दूूध, सब्जी आदि पर हाथ नहीं लगा रहे हैं तो कुछ को डर है कि हवा से कोरोना फैलता है। इसी तरह के कई मुद्दों पर आपदा प्रबंधन की यह किताब तथ्यपरक जानकारी देने की कोशिश है।
किताब की खासियत ये भी है कि इसमें चित्रों और कार्टून के जरिए संक्रमण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही लॉकडाउन के तहत घर पर रहने, सोशल डिस्टेंस का पालन करने, मास्क सही तरीके से पहनने, हाथों को बार-बार साबुन से धोने, होम क्वारंटीन के नियम आदि की जानकारी भी कार्टून और स्थानीय भाषा में इसमें दी गई है। मसलन, घर पर ही रुकने की अपील कुछ इस तरह से है - रेल रुकी, जहाज रुकी, रुक ग्या सरया संसार, अब तू भी रुक जा रे उत्तराखंडी, न रुकी त भुगतलू सारा गढ़वाल।
नेपाल ने टनकपुर सीमा पर अस्थायी रूप से स्थापित की गईं सशस्त्र पुलिस की तीन पोस्टों को हटा दिया है। बताया गया कि सशस्त्र पुलिस की ये तीनों पोस्टें कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सीमा सील होने के बाद नेपाल ने अस्थायी रूप से स्थापित कीं थीं। सीमा पर निगरानी रख रही भारतीय खुफिया एजेंसी ने भी इस बात की पुष्टि की है।
सीमा पार के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक टनकपुर से लगी नेपाल सीमा के मटैना में स्थापित सशस्त्र पुलिस की दो अस्थायी पोस्टों को हटाकर वहां तैनात फोर्स को कंचनपुर जिला मुख्यालय महेंद्रनगर बुला लिया गया है। नेपाल के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि सशस्त्र पुलिस की ये तीनों पोस्टें कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए अस्थायी रूप से स्थापित की गईं थीं।
इन पोस्टों का उद्देश्य भारत से लौट रहे प्रवासियों के गुपचुप तरीके से इस सीमा से नेपाल में प्रवेश को रोकना था। चूंकि अब भारत से नेपाल के प्रवासियों के लौटने की संख्या कम हो गई है तो इन पोस्टों का कोई औचित्य नहीं रह गया था। इधर, सीमा पर निगरानी रख रही एक खुफिया एजेंसी ने भी इस बात की पुष्टि की है।