यूएई के मैदानों में इस साल बल्लेबाजों को रन बनाने में परेशानी हुई है। यहां की धीमी पिच में बल्लेबाज ज्यादा चौके-छक्के नहीं लगा पाए हैं। इस वजह से आईपीएल में भी दर्शकों की संख्या में कमी आई थी और टी-20 वर्ल्डकप में भी इसका असर दिख सकता है।
टी-20 वर्ल्डकप 2021 में टॉप 12 टीमों के मैच 23 अक्तूबर से शुरु हो रहे हैं। इस बार भारत को इस टूर्नामेंट की मेजबानी मिली है, लेकिन कोरोना वायरस के चलते सभी मैचों का आयोजन दुबई और ओमान में हो रहा है। आईपीएल 2021 का आयोजन भी इन्हीं मैदानों पर हुआ था। यहां की धीमी पिचों में बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने में परेशानी हुई है और अधिकतर मैचों में ज्यादा रन नहीं बने हैं। चौके-छक्के न लगने से दर्शकों को आईपीएल के मैच पसंद नहीं आए और दर्शकों की संख्या में कमी आई है। टी-20 वर्ल्डकप में भी इन पिचों पर ज्यादा रन बनने मुश्किल हैं। ऐसे में टी-20 वर्ल्डकप के मैच भी दर्शकों को ज्यादा रास नहीं आएंगे और दर्शकों की संख्या में कमी आ सकती है। ऐसा होने पर आईसीसी और बीसीसीआई दोनों को नुकसान होना तय है।
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टी-20 फॉर्मेट में ताबड़तोड़ क्रिकेट खेला जाता है और बल्लेबाज खूब चौके-छक्के लगाते हैं। इसी वजह से टेस्ट और वनडे की तुलना में टी-20 क्रिकेट ज्यादा लोकप्रिय है। हालांकि, दुबई के मैदानों में ऐसा नहीं हुआ है और बल्लेबाज ज्यादा रन नहीं बना पाए हैं। इस वजह से आईपीएल 2021 की लोकप्रियता में कमी आई थी और टी-20 वर्ल्डकप में भी इसका असर पड़ना तय है।
फैंस को पसंद आते हैं हाई स्कोरिंग मैच
क्रिकेट के जानकारों और खास फैंस को भले ही कम स्कोर वाले मैच भी मजेदार लगते हों, लेकिन आम फैंस को चौके-छक्के लगाने वाले बल्लेबाज पसंद आते हैं। उन्हें बाउंड्री लगने पर या विकेट गिरने पर जश्न मनाने का मौका मिलता है, इसलिए टी-20 क्रिकेट में ज्यादा दर्शक आते हैं। ऐसे में स्टॉकहोल्डर पिच क्यूरेटर से उम्मीद करेंगे कि आने वाले मैचों में ऐसी पिच बनाई जाएं, जिनमें ज्यादा चौके-छक्के लगें और दर्शकों की संख्या में इजाफा हो। कम स्कोर वाले मैचों की तुलना में ज्यादा स्कोर वाले मैच दर्शकों को ज्यादा पसंद आते हैं। इसी वजह से स्टॉकहोल्डर और विज्ञापन देने वाली कंपनियां हाई स्कोरिंग मैच कराना चाहती हैं।
135 रनों की तुलना में 170 रन वाले मैच ज्यादा लोकप्रिय
160 से 180 वाले मैचों की तुलना में 200 से 250 रन वाले मैचों को दर्शक ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन इन दोनों मैचों में दर्शकों की संख्या ज्यादा अंतर नहीं होता है। वहीं 170 रन वाले मैच की तुलना में 135 रन वाले मैच को काफी कम दर्शक पसंद करते हैं। दर्शकों को वो मैच पसंद नहीं आते हैं, जिनमें गेंदबाजों का बोलबाला रहता है और तीन-चार ओवरों तक लगातार कोई बाउंड्री नहीं लगती है। अगर कोई टीम 180 रन पर ऑलआउट होती है तो दर्शकों को इस मैच में भरपूर एक्शन देखने को मिलता है, लेकिन जब कोई टीम 120 रनों पर सिमट जाती है तो उन्हें चौके-छक्के देखने को नहीं मिलते और दर्शक मैच देखना पसंद नहीं करते।
टी-20 क्रिकेट में दर्शक विकेटों की बजाय चौके-छक्के देखना ज्यादा पसंद करते हैं। इसी वजह से 80 फीसदी लोकप्रिय क्रिकेटर बल्लेबाज होते हैं। रोहित शर्मा से लेकर क्रिस गेल और एबी डिविलियर्स तक वो सभी खिलाड़ी जो बड़े शॉट खेलने में माहिर हैं उन्हें ही फैंस ज्यादा पसंद करते हैं। वहीं उनकी तुलना में जसप्रीत बुमराह और राशिद खान जैसे गेंदबाजों को फैंस उतना पसंद नहीं करते हैं, जितना वो अपने चहेते बल्लेबाज को करते हैं। इसी वजह से टी-20 क्रिकेट की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए हाई स्कोरिंग मैच होने जरूरी हैं।
पारी के अंत में ज्यादा मैच देखते हैं दर्शक
टी-20 क्रिकेट में अधिकतर दर्शक पूरा मैच नहीं देखते हैं। वो पहली पारी की शुरुआत में मैच देखते हैं और बीच में दूसरे कामों में व्यस्त हो जाते हैं पारी के अंत में ज्यादा चौके-छक्के लगते हैं। इस वजह से पहली पारी के अंत में दर्शकों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं पहली पारी के शुरुआती चार ओवरों में तीन-चार विकेट गिरने पर दर्शक ऐसा मान लेते हैं कि मैच में ज्यादा रोमांच नहीं होगा और वो दूसरी पारी के अंत में मैच तभी देखते हैं, जब मैच फंस रहा हो। पहली पारी की शुरुआत में ही खूब रन बनने पर दर्शकों की रुचि मैच में बढ़ जाती है और लगातार मैच देखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि चौके-छक्के लगने से उनका भरपूर मनोरंजन होता रहता है। अच्छी रन चेज होने पर दूसरी पारी के अंत में दर्शकों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। इसी वजह से कोहली और धोनी जैसे खिलाड़ी ज्यादा लोकप्रिय हैं, जो लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छा प्रदर्शन करते हैं।