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Make in India: 100 करोड़ के वैक्सीनेशन से इस कार्यक्रम को मिलेगी रफ्तार, अब तक कैसा रहा सफर

Fri, 22 Oct 2021 02:20 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत बहुत बड़ी होती है। माना जा रहा है कि 100 करोड़ वैक्सीन लगाए जाने के लक्ष्य के बाद इस कार्यक्रम को और रफ्तार मिलने वाली है। 
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मेक इन इंडिया - फोटो : Getty
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विस्तार
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देश ने गुरुवार को 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि पर देश को बधाई देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों को संबोधित किया। पीएम ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वैक्सीन बनाने को लेकर भारत पर सवाल थे, लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने इसे साबित किया। उन्होंने कहा भारत ने वैक्सीन बनाने में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली। अगर मेरे देश की वैक्सीन हमें सुरक्षा दे सकती है तो हमारे देश के उत्पाद भी हमारे लिए अच्छे होंगे। पीएम ने अपने देश में बने वैक्सीन के जरिए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर जोर दिया। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मेक इन इंडिया कार्यक्रम को और धार मिलेगी। 
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क्या है ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम 
देश में मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए इस अभियान की शुरुआत पीएम मोदी ने 25 सितंबर 2014 को की थी। इस पहल का मकसद बहुराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित करके भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब में तब्दील करना और विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर को 12-14 फीसदी प्रति वर्ष तक बढ़ाना था। साथ ही बुनियादी ढांचे का विकास करके इसके जरिए घरेलू और विदेशी, दोनों निवेशकों के लिए देश में एक अनुकूल माहौल तैयार करना था। जिससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और लोगों में कौशल विकास हो। केंद्र सरकार की इस योजना का यह भी मकसद था कि व्यापार करने को आसान बनाया जाए, घरेलू उत्पादन को बढावा मिले और साथ ही स्वदेशी उत्पादों का आयात भी हो सके। 
 

कश्मीर में बन रहे हैं इंजीनियरिंग के अजूबे - फोटो : File Photo
इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं
स्पेस, ऑटोमोबाइल, विमानन, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन और पेट्रोरसायन, कंस्ट्रक्शन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी, चमड़ा, खुदाई, तेल और गैस दवाइयों, बंदरगाह और शिपिंग, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत मशीनरी, पर्यटन और आतिथ्य, वस्त्र एवं परिधान और मीडिया समेत 27 क्षेत्र मेक इन इंडिया के तहत आते हैं। 

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार ने देश में कारोबार करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाये हैं। कई नियमों एवं प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया और कई बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जिससे उद्योगपतियों को उद्योग की स्थापना में आसानी हो। कई वस्तुओं से गैर जरुरी लाइसेंस को हटाया गया है। व्यापारिक संस्थाओं को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट सिटी के विकास पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के माध्यम से कुशल मानव शक्ति तैयार किए जा रहे हैं। 



इस कार्यक्रम का क्या फायदा हुआ
एक मजबूत विनिर्माण क्षेत्र का विकास भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। मोदी ने पहली बार 'वोकल फॉर लोकल' का नारा दिया गया, जिसने विनिर्माण क्षेत्र में भारत की संभावनाएं उजागर हुई। लोग स्वदेशी उत्पाद बनाने और खरीदने के लिए प्रेरित हुए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में न केवल आर्थिक विकास को उच्च पथ पर ले जाने की क्षमता है बल्कि बड़ी संख्या में हमारे युवा श्रम बल को रोजगार प्रदान करने की भी क्षमता है। हाल ही में, सरकार ने भारत में घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए चल रही योजनाओं के अलावा कई कदम और उठाए हैं। जैसे नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन का निर्माण किया गया और कॉरपोरेट टैक्स में कमी की गई है। साथ ही  घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय अपनाए गए हैं। बजट में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के लिए 2019-20 में 651.58 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। जबकि 2020-21 में 1,281.97 करोड़ रुपये आवंटित हुए। 


 

भारत की अगली पीढ़ी की एंटी रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-1 - फोटो : ANI
रैंकिंग में 63वें स्थान पर पहुंचा भारत
ईज ऑफ डूइंग यानी बिजनेस में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की वजह से मौजूदा प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया। देश के निवेश के माहौल में सुधार के लिए कई उपाय किए गए। जिसका परिणाम यह निकला कि विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (डीबीआर) 2020 के अनुसार रैंकिंग में भारत 63वें स्थान पर पहुंच गया है। 

विदेशी निवेश पर कितना असर 
योजना की शुरुआत के कुछ समय बाद ही वर्ष 2015 में ही में भारत ने अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया था। कुछ प्रमुख क्षेत्रों को अब एफडीआई के लिए खोल दिया गया है। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को 49 फीसदी, स्पेस में 74 फीसदी और मीडिया में 26 फीसदी तक बढ़ाया गया है। वहीं अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के लिए रक्षा क्षेत्र में एफडीआई 100 फीसदी, रेल के बुनियादी ढांचों की परियोजनाओं के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति मिल गई है।

अनुमान है कि मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और इनसे जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से 2022 तक करीब 10 करोड़ नई नौकरियां बढ़ेंगी। यदि इतने सारे लोगों को रोजगार मिलता है तो अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी कई और क्षेत्रों में वस्तुओं और सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला देश है। उम्मीद की जाती है कि वर्ष 2020 तक यह दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश भी बन जाएगा।
 
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चीन के सामान के बहिष्कार का पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन करते अधिवक्ता (फाइल फोटो)
कहां रह गई कमी
मेक इन इंडिया कई क्षेत्रों में प्रगति पर है लेकिन कई क्षेत्र ऐसे रह गए जिसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल का सबसे नकारात्मक प्रभाव भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ा क्योंकि इस पहल में भारत के कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि यह कार्यक्रम अधिकांशत विदेशी निवेश पर आधारित है। इसका नतीजा यह हुआ है कि एफडीआई में एक अनिश्चितता बनी रही क्योंकि क्योंकि भारत में उत्पादन की योजना किसी और देश में मांग और पूर्ति के आधार पर निर्धारित की जा रही थी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के एक अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर के मुताबिक ‘मेक-इन इंडिया’ को शुरू हुए सात साल बीतने के बावजूद विदेशी कंपनियों ने भारत में अपनी फैक्ट्री लगाने में कोई खास रुचि नहीं ली। जैसे कोरोना महामारी फैलने के बाद कई कंपनियों ने चीन से पलायन किया लेकिन वे भारत आने के बजाए वियतनाम जैसे छोटे से देश में दिलचस्पी लेने लगीं।

उनका कहना है कि मेक इन इंडिया’ की सफलता के लिए सरकार ने कई प्रयास किए, लेकिन योजना का असर उस स्तर पर नहीं हुआ जितना सरकार ने दावा किया था, लेकिन फिर भी इसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि यदि यह कार्यक्रम सफल हुआ तभी विनिर्माण क्षेत्र में ‘मेक इन चाईना’ का वर्चस्व समाप्त किया जा सकता है। 



 
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