कश्मीर में बन रहे हैं इंजीनियरिंग के अजूबे
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इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं
स्पेस, ऑटोमोबाइल, विमानन, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन और पेट्रोरसायन, कंस्ट्रक्शन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी, चमड़ा, खुदाई, तेल और गैस दवाइयों, बंदरगाह और शिपिंग, रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत मशीनरी, पर्यटन और आतिथ्य, वस्त्र एवं परिधान और मीडिया समेत 27 क्षेत्र मेक इन इंडिया के तहत आते हैं।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार ने देश में कारोबार करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाये हैं। कई नियमों एवं प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया और कई बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जिससे उद्योगपतियों को उद्योग की स्थापना में आसानी हो। कई वस्तुओं से गैर जरुरी लाइसेंस को हटाया गया है। व्यापारिक संस्थाओं को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट सिटी के विकास पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के माध्यम से कुशल मानव शक्ति तैयार किए जा रहे हैं।
इस कार्यक्रम का क्या फायदा हुआ
एक मजबूत विनिर्माण क्षेत्र का विकास भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। मोदी ने पहली बार 'वोकल फॉर लोकल' का नारा दिया गया, जिसने विनिर्माण क्षेत्र में भारत की संभावनाएं उजागर हुई। लोग स्वदेशी उत्पाद बनाने और खरीदने के लिए प्रेरित हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में न केवल आर्थिक विकास को उच्च पथ पर ले जाने की क्षमता है बल्कि बड़ी संख्या में हमारे युवा श्रम बल को रोजगार प्रदान करने की भी क्षमता है। हाल ही में, सरकार ने भारत में घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए चल रही योजनाओं के अलावा कई कदम और उठाए हैं। जैसे नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन का निर्माण किया गया और कॉरपोरेट टैक्स में कमी की गई है। साथ ही घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय अपनाए गए हैं। बजट में मेक इन इंडिया कार्यक्रम के लिए 2019-20 में 651.58 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। जबकि 2020-21 में 1,281.97 करोड़ रुपये आवंटित हुए।
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