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विभाजन के बाद भी पाकिस्तान ध्यानचंद को करता रहा प्यार

Tue, 17 Oct 2017 02:41 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
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मेजर ध्यानचंद
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मेजर ध्यानचंद हॉकी जगत का एक ऐसा नाम है जिसने हॉकी को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाई। हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के खेल के दीवाने केवल भारत ही में नहीं थे बल्कि पूरे विश्व और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी उनके मुरीद थे। दरअसल, भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद भारतीय हॉकी टीम एक बार पेशावर जा रही थी। लाहौर रेलवे स्टेशन पर कुछ हॉकी प्रेमियों ने ध्यानचंद को देख लिया।
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इसके बाद ध्यानचंद की एक झलक पाने के लिए हजारों की भीड़ स्टेशन पर जमा हो गई। बताया जाता है कि स्टेशन पर इतनी भीड़ जमा हो गई कि ट्रेन काफी विलंब से रवाना हुई और टीम चार घंटे लेट पेशावर पहुंची थी। ध्यानचंद को देखने के लिए हजारों फैंस की तादाद लगी हुई थी। वैसे तो दद्दा तीनों ओलंपिक के सदस्य रहे लेकिन 1936 के बर्लिन ओलिंपिक में उनका कमाल देखते हुए जर्मनी के अखबारों में एक हेडलाइन छपी थी- 'हॉकी के स्टेडियम में भारत के जादूगर को देखने के लिए पहुंचे लोग'। बर्लिन ओलिंपिक में भारत ने 8-1 से मैच जीता था। उस मैच में दद्दा और उनके भाई रूप सिंह का बड़ा योगदान था।

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बता दें कि मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे। हॉकी के क्षेत्र में दद्दा को भारत एवं विश्व में सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है। वे तीन बार ओलंपिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे हैं, जिनमें 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 का लॉस एंजलिस ओलंपिक एवं 1936 का बर्लिन ओलंपिक शामिल है। 
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  ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
   
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